आपातकाल की भयावहता को कभी भुलाया नहीं जाएगा
बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आपातकाल की निंदा की गई। आपातकाल लगाने से पहले और आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों के पीड़ितों के लिए मौन रखा गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने आपातकाल के दौरान पीड़ित अनगिनत व्यक्तियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने उन लोगों के सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा, जिनके संवैधानिक रूप से गारंटीकृत लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए थे और जिन्होंने एक सत्तावादी शासन के तहत अनगिनत पीड़ाएँ झेली थीं। मंत्रिमंडल ने संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि आपातकाल की भयावहता को कभी भुलाया नहीं जाएगा।
…अनुकरणीय साहस और वीरतापूर्ण प्रतिरोध को दी श्रद्धांजलि
यह आयोजन आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ का प्रतीक है और यह भारतीय लोगों के लचीलेपन और लोकतांत्रिक आदर्शों में उनकी अटूट आस्था की एक शक्तिशाली याद दिलाता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन अनगिनत व्यक्तियों के बलिदान को याद करने और सम्मानित करने का संकल्प लिया है, जिन्होंने आपातकाल और भारतीय संविधान की भावना को नष्ट करने के उसके प्रयास का बहादुरी से विरोध किया था। emergency की शुरुआत 1974 में नवनिर्माण आंदोलन और संपूर्ण क्रांति अभियान को कुचलने के एक कठोर प्रयास के साथ हुई थी। उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय मंत्रिमंडल ने emergency की ज्यादतियों के खिलाफ उनके अनुकरणीय साहस और वीरतापूर्ण प्रतिरोध को श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने आपातकाल की आलोचना की
दूसरी ओर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा emergency लगाए जाने की आलोचना करते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि उनके पोते राहुल गांधी ने विदेशी धरती पर यह दावा करके देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है. emergency की 50वीं बरसी पर एक बयान में कुमार ने कहा कि emergency स्वतंत्रता के बाद देश के इतिहास का एक काला अध्याय है. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाया था.
आपातकाल में लोगों की आवाज दबाई गईः बंदी संजय कुमार
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने कहा कि emergency के दौरान लोकतंत्र की हत्या की गई, लोगों की आवाज दबा दी गई, विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया और इस पर सवाल उठाने वाले विपक्षी सांसदों की सदस्यता तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने रद्द कर दी थी. emergency के 50 साल पूरे होने पर बुधवार को देश में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें आपातकाल पर चर्चा हुई और बताया गया कि यह भारतीय लोकतंत्र पर कितना बड़ा कुठाराघात था.
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