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National : कपिल सिब्बल ने जज वर्मा को लेकर गंभीर सवाल

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Updated: June 17, 2025 • 10:25 AM
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वर्मा के खिलाफ आरोप इतने स्पष्ट नहीं कि… : कपिल

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जज यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व कांग्रेस नेता सिब्बल पहले भी दो बार उच्च न्यायालय के जजों के महाभियोग मामलों में शामिल रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्मा के खिलाफ आरोप इतने स्पष्ट नहीं हैं कि उनके आधार पर महाभियोग चलाया जाए। सिब्बल ने कहा, ‘इस मामले में जांच के बिना किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। महज कुछ वीडियो क्लिप और जले हुए नोटों की बातें, जो मीडिया में आई हैं, उन्हें बिना जांच के आधार नहीं बनाया जा सकता।’

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर यादव के खिलाफ कार्रवाई रुकी क्यों? : कपिल

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार पक्षपात कर रही है। सिब्बल ने सरकार और राज्यसभा के सभापति पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ 55 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित महाभियोग प्रस्ताव पर छह महीने से कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘न्यायमूर्ति यादव का सांप्रदायिक भाषण स्पष्ट है और इसे उन्होंने अस्वीकार नहीं किया। फिर भी, सभापति ने हस्ताक्षरों की जांच के लिए इतना समय क्यों लिया? यह स्पष्ट है कि सरकार इस न्यायाधीश को बचाना चाहती है।’

कपिल सिब्बल ने उठाया सवाल

सिब्बल ने यह भी सवाल उठाया कि सभापति ने मुख्य न्यायाधीश को न्यायमूर्ति यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच को रोकने के लिए पत्र क्यों लिखा, जबकि न्यायमूर्ति वर्मा के मामले में ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि विपक्ष को न्यायमूर्ति यादव के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया पहले शुरू करने पर जोर देना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि पहले जज यादव के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, उसके बाद ही वर्मा के मामले पर विचार होना चाहिए।

‘वर्मा के खिलाफ आरोप अस्पष्ट हैं’

सिब्बल ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को अभूतपूर्व और तथ्यों पर आधारित नहीं बताया। सिब्बल ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आरोप अतीत के किसी भी महाभियोग मामले से अलग हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले मामलों में, जैसे न्यायमूर्ति रामास्वामी, एस.के. गंगेले, सौमित्र सेन और एके. गांगुली के खिलाफ, तथ्य स्पष्ट थे और किसी अतिरिक्त जांच की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन न्यायमूर्ति वर्मा के मामले में, कोई ठोस तथ्य नहीं हैं, सिवाय इसके कि उनके आवास के आउटहाउस में जली हुई नकदी के वीडियो हैं।’

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