Bihar-नीट छात्रा मामला-पुलिस जांच पर उठे सवाल, नीतीश सरकार ने सीबीआई को सौंपी जांच

By Anuj Kumar | Updated: January 31, 2026 • 11:47 AM

पटना। बिहार के चित्रगुप्त नगर में नीट छात्रा (Neet Student) के साथ हुई दरिंदगी और उसकी संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का निर्णय लिया है। शनिवार को उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी (Smarat Choudhary) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस जानकारी की पुष्टि की।

सीएम नीतीश ने केंद्र से की सीबीआई जांच की सिफारिश

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से कांड संख्या- 14/26 की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया है, ताकि घटना की पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से जांच सुनिश्चित की जा सके।

परिजनों का आरोप: आत्महत्या मानने का दबाव बनाया गया

वहीं परिजनों का आरोप है कि उन्हें मामले को दबाने और इसे आत्महत्या स्वीकार करने के लिए कहा गया। परिजनों ने यहां तक कह दिया कि उन्हें स्थानीय पुलिस से न्याय की कोई उम्मीद नहीं बची है। शुक्रवार को पीड़िता की मां की मुलाकात राज्य के डीजीपी विनय कुमार से हुई थी, जिसके बाद वे काफी आक्रोशित नजर आईं।

17 दिन की जांच के बाद भी पुलिस के हाथ खाली

सीबीआई जांच का निर्णय बिहार पुलिस द्वारा 17 दिनों की सघन जांच के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर न पहुंच पाने के बाद लिया गया है। इस दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली और विशेष जांच दल (एसआईटी) की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे। मृत छात्रा के परिजनों ने पुलिस पर जांच की दिशा भटकाने का आरोप लगाते हुए गहरा असंतोष जताया।

डीजीपी और मुख्य सचिव से हुई समीक्षा बैठक

शुक्रवार शाम को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डीजीपी और मुख्य सचिव को तलब कर जांच की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों को पारदर्शिता बरतने के सख्त निर्देश देने के बाद सरकार ने मामले की गंभीरता और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए सीबीआई जांच का फैसला लिया।

एफएसएल रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा

मामले में नया मोड़ तब आया जब विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट में मृत छात्रा के कपड़ों से पुरुष स्पर्म के अवशेष मिलने की पुष्टि हुई।

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पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की आशंका, डीएनए जांच शुरू

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दुष्कर्म की संभावना से इनकार नहीं किया गया था और छात्रा के शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे। इन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने पुलिस की थ्योरी को कमजोर कर दिया, जिसके बाद एसआईटी ने डीएनए टेस्ट के लिए परिजनों समेत 30 से अधिक लोगों के रक्त के नमूने लिए।

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