Dehradun- अंकिता हत्याकांड पर नया मोड़, CBI जांच के लिए पत्र, पूर्व विधायक तैयार

By Anuj Kumar | Updated: January 13, 2026 • 12:29 PM

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murdercase) में न्याय की मांग और वीआईपी (VIP) की भूमिका को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सरकार ने इस संवेदनशील मामले की सीबीआई जांच के लिए औपचारिक पत्र भेज दिया है।

सरकार ने CBI जांच के लिए भेजा पत्र

मुख्यमंत्री के सचिव शैलेश बगौली ने पुष्टि की कि अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और मांगों का सम्मान करते हुए यह फैसला लिया गया है। पत्र में उस वीआईपी की भूमिका की गहन जांच का अनुरोध किया गया है, जिसका नाम बार-बार इस प्रकरण में सामने आता रहा है।

हत्याकांड का पूरा ब्योरा CBI को सौंपा

सरकार द्वारा भेजे गए पत्र में पूरे हत्याकांड का विवरण दिया गया है और केंद्रीय जांच एजेंसी से निष्पक्ष व गहन जांच का आग्रह किया गया है। सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री से मिले थे अंकिता के माता-पिता

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने हाल ही में देहरादून (Dehradun) में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने वीआईपी की भूमिका की जांच सीबीआई से कराने और सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच की मांग रखी थी।

सरकार का भरोसा: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

कानूनी पहलुओं पर विचार के बाद मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जांच की आंच में जो भी आएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।

वायरल ऑडियो-वीडियो से बढ़ा कानूनी दबाव

मामले से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद जांच और तेज हो गई है। आरोपों के घेरे में आए पूर्व विधायक सुरेश राठौर सोमवार देर रात नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचे, जहां उनसे लंबी पूछताछ की गई।

ऑडियो क्लिप पर पुलिस की गहन पूछताछ

पुलिस का मुख्य फोकस उस ऑडियो क्लिप पर रहा, जिसमें कथित तौर पर पूर्व विधायक की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान राठौर ने माना कि आवाज उनकी हो सकती है, लेकिन उन्होंने कहा कि उस वक्त वे पूरी तरह होश में नहीं थे।

नशे की दवाओं का हवाला, रिकॉर्डिंग पर सवाल

पूर्व विधायक ने दलील दी कि स्वास्थ्य कारणों से ली गई नींद की दवाओं के कारण वे उस स्थिति में नहीं थे और यह बातचीत उनकी जानकारी व सहमति के बिना रिकॉर्ड की गई थी, इसलिए इसे प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

नार्को टेस्ट और वॉयस सैंपल पर सहमति

पुलिस उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं दिखी, जिसके बाद जांच को वैज्ञानिक आधार देने की तैयारी की गई। सुरेश राठौर के सामने वॉयस सैंपल और नार्को टेस्ट का विकल्प रखा गया, जिस पर उन्होंने लिखित सहमति दे दी है।

फॉरेंसिक जांच से खुलेगा राज

अब पुलिस फॉरेंसिक लैब के जरिए आवाज के मिलान और नार्को टेस्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। सरकार और पुलिस ने निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच का भरोसा दिलाया है, ताकि हत्याकांड के रहस्य से पर्दा उठ सके और दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सके।

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