नई दिल्ली/पटना । बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री (Nitish Kumar) ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी राजनीतिक पारी का नया अध्याय शुरू कर दिया है। उनके इस कदम को बिहार में सत्ता परिवर्तन की दिशा में अहम माना जा रहा है।
चारों सदनों के सदस्य बनने का गौरव
Nitish Kumar ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली है। 1985 में बिहार विधानसभा से शुरुआत करने वाले नीतीश कुमार 6 बार लोकसभा सांसद रहे, वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद 4 बार विधान परिषद के सदस्य भी चुने गए। अब राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही उन्होंने संसद और राज्य के चारों सदनों में सदस्य रहने का दुर्लभ रिकॉर्ड हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ वह (Lalu Prasad Yadav )के बाद ऐसे दूसरे नेता बन गए हैं, जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने के संकेत
दिल्ली पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत में Nitish Kumar ने संकेत दिया कि अब वे राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके राज्यसभा जाने के फैसले के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है।
इस्तीफे की अटकलें तेज
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री 12 अप्रैल को दिल्ली से पटना लौट सकते हैं। इसके बाद 13 अप्रैल को कैबिनेट की संभावित आखिरी बैठक हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल को वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान संभव है।
नई सरकार को लेकर बयान
बिहार के मंत्री (Vijay Kumar Chaudhary) ने कहा कि राज्य में राजग सरकार का गठन होगा और आगे भी ‘नीतीश मॉडल’ पर ही काम जारी रहेगा, जैसा कि पिछले दो दशकों से होता आया है।
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पहले ही दे चुके हैं परिषद से इस्तीफा
Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। जनता दल (यू) के प्रमुख 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
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