National- ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को चर्चा, सरकार को बहुमत का भरोसा

By Anuj Kumar | Updated: February 16, 2026 • 1:18 PM

नई दिल्ली,। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (OM Birla) के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को लोकसभा में चर्चा और मतदान हो सकता है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन इस प्रस्ताव पर बहस कराई जाएगी और उसके बाद वोटिंग होगी।

सरकार जल्द निपटारा चाहती है

संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू (Kiren Rijijiu) ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को शीघ्र निपटाना चाहती है ताकि स्पीकर सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से संचालित कर सकें और सरकार अपने विधायी एजेंडे पर आगे बढ़ सके। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सदन में पर्याप्त समर्थन प्राप्त है।

सदन में एनडीए की स्थिति मजबूत

542 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है और कुछ अन्य दलों के सदस्यों का भी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सरकार को पूरा विश्वास है कि अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाएगा।

राजनीतिक संकेत और रणनीति

सूत्रों के अनुसार, सत्तारूढ़ गठबंधन इस राजनीतिक विवाद को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है। माना जा रहा है कि सरकार स्पीकर के प्रति अपना समर्थन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहती है। हाल ही में सरकार ने बिरला को बांग्लादेश (Bangladesh) में शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिनिधित्व के लिए भेजने का निर्णय लिया, जिसे राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

विपक्ष की एकजुटता की कोशिश

उधर विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुटता बनाने में जुटा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे दलों के रुख पर सबकी नजर है। कांग्रेस ने कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव का मुद्दा भी उठाया है, जबकि टीएमसी पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर रही है।

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शक्ति परीक्षण बनेगी 9 मार्च की बहस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 9 मार्च की बहस सिर्फ संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच शक्ति परीक्षण भी होगी। यदि प्रस्ताव गिरता है तो सरकार इसे अपनी मजबूती के संकेत के रूप में पेश करेगी, वहीं विपक्ष इसे निष्पक्षता और संसदीय परंपराओं से जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करेगा।

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