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National- राहुल गांधी ने एलपीजी संकट पर मोदी सरकार को घेरा

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: April 6, 2026 • 5:19 PM
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नई दिल्ली – ईरान युद्ध के बाद एलपीजी की कमी को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Ganhdi) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एलपीजी गैस संकट को कोविड की तरह हैंडल करने का वादा किया था, लेकिन हालात बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे कोविड के समय थे।

प्रवासी मजदूरों पर संकट

राहुल गांधी ने कहा, “बिल्कुल कोविड (Covid) के जैसे ही नीति शून्य, घोषणाएं बड़ी और बोझ गरीबों पर। 500-800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई। रात को घर लौटते मजदूर के पास चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा – शहर छोड़ो, गांव भागो।”

उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र पर असर

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल मिलों और फैक्ट्रियों की रीढ़ माने जाने वाले मजदूर आज टूट रहे हैं। “टेक्सटाइल सेक्टर पहले से आईसीयू में है। विनिर्माण क्षेत्र दम तोड़ रहा है और यह संकट उस कूटनीति की चूक का नतीजा है जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती। जब अहंकार नीति बन जाए, अर्थव्यवस्था चरमराती है, मजदूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे चला जाता है।” राहुल गांधी ने सवाल उठाया, “हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? यह सिर्फ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।”

डेटा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता

राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में आरोप लगाया कि सरकार ने देशवासियों को यह नहीं बताया कि भारत का डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा। उन्होंने अपने व्हाट्सएप चैनल पर लिखा, “भारत का डेटा भारत के लोगों का है। एआई आधारित अर्थव्यवस्था में एआई का निर्माण करना, कंपनियों का विकास करना और नौकरियां पैदा करना हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है।”

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डेटा के संबंध में पारदर्शिता की मांग

राहुल गांधी ने कहा, “मैंने सरकार से अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते के बारे में सवाल किए – व्यापार बाधाओं को कम करने का हमारे डेटा के लिए क्या मतलब है? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में रहेगा? क्या भारत को अब भी विदेशी कंपनियों को डेटा संग्रहीत करने और उसका उपयोग अपनी एआई बनाने के लिए करने की आवश्यकता हो सकती है?” उन्होंने कहा कि सरकार देश को यह बताने से इनकार करती है कि वह किस मुद्दे पर बातचीत कर रही है। “हमें वैश्विक तकनीकी दौड़ में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय हमें यह अंधेरे में रखा गया कि भारत का डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा। लोग हमारे डेटा के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही के हकदार हैं। हम बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए अपने डेटा का स्वामित्व रखने और उसका उपयोग करने के हकदार हैं।”

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