नई दिल्ली। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Minister of Natural Gas Hardeep Singh Puri) ने 9-10 अप्रैल को कतर का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कतर के ऊर्जा मंत्री साद शेरिडा अल-काबी से मुलाकात कर द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। दोनों नेताओं ने 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिवसीय युद्धविराम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित होगी।
ऊर्जा संकट के बीच कतर बना अहम साझेदार
भारत इस समय अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका, ओमान (Oman) और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ा रहा है, लेकिन कतर के साथ मजबूत संबंध घरेलू गैस कीमतों को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी माने जा रहे हैं।
8 अप्रैल से शुरू हुआ 14 दिनों का युद्धविराम भारत के लिए एक “गोल्डन विंडो (Golden Window) साबित हो सकता है, जिसके जरिए फंसे हुए कार्गो को निकालने और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
फोर्स मेज्योर से रुकी सप्लाई, जहाज फंसे
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से फोर्स मेज्योर लागू होने के कारण कतर से भारत को एलएनजी की खेप नहीं मिल पाई है। वर्तमान में करीब 16 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार तेहरान के साथ लगातार बातचीत कर रही है।
कतर का भरोसा: सप्लाई जल्द होगी बहाल
कतर ने भारत को एक भरोसेमंद ऊर्जा भागीदार बताते हुए गैस आपूर्ति बहाल करने और क्षतिग्रस्त संयंत्रों की मरम्मत का आश्वासन दिया है। ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत को कतर से एलएनजी की एक भी खेप नहीं मिली थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और रास लफान संयंत्र पर हमलों के चलते कतर को फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ा था।
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समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
पुरी और अल-काबी ने समुद्री मार्गों से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों देशों के बीच यह सहयोग आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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