Latest Hindi News : लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को राहत, अब 4 दिसंबर को तय होंगे आरोप

By Anuj Kumar | Updated: November 10, 2025 • 2:07 PM

नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला सुनाना था। लेकिन अदालत ने यह निर्णय स्थगित कर दिया और अगली सुनवाई की तारीख 4 दिसंबर निर्धारित की। इससे लालू परिवार समेत सभी आरोपियों को फिलहाल राहत मिली है। कोर्ट ने 25 अगस्त को आरोप तय करने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सीबीआई का आरोप – नौकरी के बदले जमीन का सौदा

इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी (Rabdi Devi) उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव सहित कुल 78 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इनमें रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल हैं। सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते लालू यादव ने ग्रुप डी पदों पर नियुक्तियां कीं। बदले में उम्मीदवारों या उनके परिजनों से पटना में कम कीमत पर जमीनें अपने और परिवार के नाम पर लिखवाईं। ये नियुक्तियां बिना विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के की गईं। एजेंसी ने 7 अक्टूबर 2022 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को इस पर संज्ञान लिया। अंतिम चार्जशीट 7 जून 2024 को दाखिल हुई।

लालू-राबड़ी और तेजस्वी नहीं हुए पेश

सोमवार की सुनवाई में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव अदालत में पेश नहीं हुए। उनके वकील मनिंदर सिंह ने पेशी से छूट की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अभियोजन के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई, इसलिए पूरी जांच अवैध है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति जांच शुरू नहीं हो सकती और कार्यवाही गलत है। वहीं, सीबीआई की ओर से वकील ने आरोप लगाया कि लालू पक्ष जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में दलीलें नहीं दे रहा।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही लड़ाई

लालू यादव ने सीबीआई की एफआईआर रद्द करने और ट्रायल पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। लालू परिवार ने सभी आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। अब 4 दिसंबर को कोर्ट तय करेगी कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं। यदि आरोप तय हुए, तो मुकदमे की औपचारिक सुनवाई शुरू हो जाएगी। इससे लालू परिवार की कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

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