Saradha scam : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शारदा समूह घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम भी इस घोटाले को लेकर फिर सुर्खियों में है। शारदा समूह की स्थापना सुदीप्तो सेन ने वर्ष 2000 में की थी। शुरुआत में छोटी कंपनी के रूप में शुरू हुआ यह समूह बाद में रियल एस्टेट, मीडिया, पर्यटन और विमानन जैसे कई क्षेत्रों में फैल गया। कंपनी ने लोगों को भारी मुनाफा, ऊंचा ब्याज, विदेश यात्राएं और मुफ्त भूखंड देने का लालच दिया।
आरोप है कि यह पूरा कारोबार पोंजी योजना की तरह चलाया गया। नए निवेशकों से जुटाए गए पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। इस तरह लोगों का भरोसा जीतकर ग्रामीण इलाकों से बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया। कुछ समय बाद नए निवेशकों की संख्या घटने लगी और कंपनी आर्थिक रूप से टूट गई। वर्ष 2013 तक शारदा समूह पूरी तरह बंद हो गया। इस घोटाले में लगभग दस हजार करोड़ रुपये से अधिक की जनता की रकम डूबने का अनुमान लगाया गया।
घोटाले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल आ गया। उस समय सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के नाम जांच में सामने आए। सुदीप्तो सेन द्वारा लिखे गए पत्र में भी कई राजनीतिक नेताओं का उल्लेख होने की खबरें सामने आई थीं।
उस समय तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल शुभेंदु अधिकारी पर भी विपक्ष ने आरोप लगाए। कहा गया कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर शारदा समूह की गतिविधियों को समर्थन दिया और आर्थिक लाभ प्राप्त किए। हालांकि शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों ने की। कई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
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बाद में शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। विपक्ष का आरोप है कि (Saradha scam) पहले जिन पर भाजपा सवाल उठाती थी, पार्टी में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ नरमी बरती गई। शारदा घोटाले के कारण लाखों परिवारों की जीवनभर की बचत खत्म हो गई। आज भी कई पीड़ित न्याय और मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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