పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం

Shubhanshu Shukla: अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के सफलता के मंत्र

Author Icon By Dhanarekha
Updated: January 11, 2026 • 10:46 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

युवाओं के लिए ‘फाइंडिंग नीमो’ से लेकर 2047 के भारत तक का विजन

नई दिल्ली: शुभांशु शुक्ला(Shubhanshu Shukla) ने युवाओं को फिल्म ‘फाइंडिंग नीमो’ के प्रसिद्ध सबक ‘बस तैरते रहो’ (प्रयत्न करते रहो) के माध्यम से हार न मानने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक या दो असफलताएं किसी व्यक्ति का भविष्य तय नहीं करतीं। अंतरिक्ष यात्री के चयन की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में लचीलापन (Resilience) और असफलताओं से उबरने की क्षमता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। उनके अनुसार, सफलता का असली मार्ग अपनी संतुष्टि को त्यागकर निरंतर प्रगति की दिशा में बढ़ते रहने में है

जो पास है उसका सम्मान और वर्तमान पर ध्यान

शुक्ला(Shubhanshu Shukla) ने एक बहुत ही व्यावहारिक जीवन दर्शन साझा किया: “हमारे पास क्या नहीं है, उस पर दुखी होने के बजाय हमारे पास जो है, उसका भरपूर उपयोग करें।” उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे ‘अगर-मगर’ की कल्पनाओं में जीने के बजाय वर्तमान क्षण (Present Moment) पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए बताया कि वे बचपन में लड़ाकू पायलट बनने का सपना नहीं देखते थे, लेकिन जो अवसर उनके सामने आए, उन्होंने उनमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यही दृष्टिकोण सफलता को बिना मांगे आपके पास खींच लाता है।

अन्य पढ़े: शौर्य यात्रा में पीएम मोदी का सांस्कृतिक संदेश, डमरू बजाकर किया अभिवादन

अंतरिक्ष में भारत की छलांग और 2047 का संकल्प

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद, शुक्ला(Shubhanshu Shukla) का मानना है कि वहां से मिले अनुभव भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने गगनयान और चंद्रमा मिशनों की जिम्मेदारी आज के बच्चों और युवाओं पर डाली है। उनका दृढ़ विश्वास है कि यदि देश की नीयत और कड़ी मेहनत सही दिशा में हो, तो हम 2047 से पहले ही ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। अंतरिक्ष में शोध के नए द्वार खुलने से भारतीय वैज्ञानिकों के लिए अब संभावनाएं असीमित हैं।

शुभांशु शुक्ला के अनुसार अंतरिक्ष यात्री के चयन के दौरान किन विशेष गुणों को देखा जाता है?

शुभांशु शुक्ला(Shubhanshu Shukla) के अनुसार, चयन के दौरान मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में उम्मीदवार के लचीलेपन और उसकी असफलताओं से उबरने की क्षमता को प्रमुखता से देखा जाता है। यह देखा जाता है कि विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति कैसे खुद को संभालता है और आगे बढ़ता है।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को लेकर शुभांशु शुक्ला का क्या दृष्टिकोण है?

उनका मानना है कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य युवाओं की जिम्मेदारी है। यदि हम अपनी नीयत सही रखें और खुद पर विश्वास करें, तो हम इस मील के पत्थर को निर्धारित समय (2047) से पहले भी हासिल कर सकते हैं।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #gaganyaan-mission #Google News in Hindi #Hindi News Paper #isro-india #shubhanshu-shukla #space-exploration-news #viksit-bharat-2047

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.