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National- सोनिया गांधी ने उठाया बड़ा मुद्दा, महिला आरक्षण से ज्यादा अहम परिसीमन

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: April 13, 2026 • 12:45 PM
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New Delhi। Sonia Gandhi ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण के बहाने सरकार का असली एजेंडा परिसीमन है, जिस पर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

महिला आरक्षण के बहाने उठाया परिसीमन का मुद्दा

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने अपने एक लेख में कहा कि प्रधानमंत्री (Narendra Modi) विपक्ष से उन विधेयकों का समर्थन मांग रहे हैं, जिन्हें संसद के विशेष सत्र में जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब (Tamil Nadu) और (West Bengal) में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है, तब इस विशेष सत्र को बुलाने की क्या आवश्यकता थी।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और लागू करने पर सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि यह पूरा कदम राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित कर चुकी है, लेकिन इसे लागू करने की शर्त अगली जनगणना और परिसीमन से जोड़ी गई है। ऐसे में उन्होंने कहा कि वर्तमान सत्र में महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन असली मुद्दा है, जो संविधान के लिए चिंताजनक हो सकता है।

विपक्ष की पुरानी मांग और सरकार की तैयारी

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विपक्ष पहले ही मांग कर चुका है कि महिला आरक्षण को 2024 के आम चुनाव से लागू किया जाए। राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने भी साल 2024 में इस संबंध में सरकार से आग्रह किया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। अब सरकार अनुच्छेद 334-ए में संशोधन कर इसे 2029 से लागू करने की तैयारी कर रही है।

टाइमिंग और यू-टर्न पर उठे सवाल

सोनिया गांधी ने सवाल उठाया कि इस फैसले पर सरकार को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे और पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष तीन बार पत्र लिखकर 29 अप्रैल को सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर चुका है, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

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खड़गे ने विशेष सत्र की टाइमिंग पर जताई आपत्ति

इस बीच Mallikarjun Kharge ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विशेष सत्र की टाइमिंग पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि चुनावों के बीच इस तरह का कदम यह दर्शाता है कि सरकार इस कानून को राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है। साथ ही, उन्होंने परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई है।

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