National- स्पेस की दिग्गज सुनीता विलियम्स का संन्यास, 9 बार अंतरिक्ष यात्रा का रिकॉर्ड

By Anuj Kumar | Updated: January 21, 2026 • 11:00 AM

नई दिल्ली । अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने नासा को अलविदा कह दिया है। नासा (Nasa) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 27 वर्षों तक एजेंसी को अपनी सेवाएं देने के बाद विलियम्स की सेवानिवृत्ति पिछले साल 27 दिसंबर से प्रभावी हो गई है।

भारत दौरे के दौरान हुई सेवानिवृत्ति की घोषणा

यह घोषणा उस समय हुई है जब सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) वर्तमान में भारत के दौरे पर हैं और अपने पैतृक देश की यादें ताजा कर रही हैं।

27 साल का शानदार करियर और अंतरिक्ष रिकॉर्ड

1998 में नासा के लिए चुनी गईं विलियम्स ने अपने करियर के दौरान तीन महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। उनके नाम 9 बार अंतरिक्ष में चहलकदमी (Space Walk) करने का रिकॉर्ड दर्ज है, जो कुल 62 घंटे 6 मिनट की रही। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए सबसे अधिक और नासा के इतिहास में चौथा बड़ा रिकॉर्ड है।

अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली महिला

इसके अतिरिक्त, वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ पूरी करने वाली दुनिया की पहली अंतरिक्ष यात्री भी बनी थीं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन

अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन रहीं सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहियो में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।

अंतिम मिशन बना सबसे चुनौतीपूर्ण अध्याय

विलियम्स का अंतिम मिशन उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण अध्यायों में से एक रहा। साल 2024 में वह बोइंग के नए स्टारलाइनर कैप्सूल की पहली परीक्षण उड़ान के तहत बुच विलमोर के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजी गई थीं। यह मिशन महज 8 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वे वहां फंस गईं।

9 महीने बाद सुरक्षित वापसी

करीब 9 महीने के लंबे और अनिश्चित इंतजार के बाद वे पिछले साल मार्च में सुरक्षित पृथ्वी पर लौट सकीं।

नासा प्रमुख की विदाई और प्रशंसा

नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने उन्हें विदाई देते हुए कहा कि सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने नेतृत्व के जरिए भविष्य के मिशनों को नया आकार दिया है और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

भारत में कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात

सेवानिवृत्ति के बाद भारत पहुंची सुनीता विलियम्स ने दिल्ली में दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कल्पना चावला की मां संयोगिता चावला और बहन दीपा से मुलाकात के दौरान भावुक होते हुए कहा कि वह नियमित रूप से उनके संपर्क में रहेंगी।

‘भारत आना हमेशा घर वापसी जैसा’

मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत वापस आना उनके लिए हमेशा घर वापसी जैसा होता है। उन्होंने याद किया कि जब वह अंतरिक्ष में थीं, तो उन्होंने सबसे पहले भारत और अपनी मां के देश स्लोवेनिया को ही खोजने की कोशिश की थी।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के अनुभव

अपनी बातचीत में उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रूस, जापान, यूरोप और कनाडा जैसे कई देशों के अंतरिक्ष यात्री उनके साथ थे। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात न हो पाने पर खेद भी जताया।

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भविष्य के लिए अहम मुद्दों पर विचार

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में मानसिक स्वास्थ्य, अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार साझा किए। उनकी विदाई न केवल नासा के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक सफर के समापन के रूप में देखी जा रही है।

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