नई दिल्ली । राजस्थान में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों (Highway) पर स्थित शराब की दुकानें फिलहाल यथावत चलती रहेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने शराब दुकान संचालकों और राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें नगर निकाय सीमा के भीतर हाईवे पर स्थित शराब की दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार और लाइसेंसधारकों की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करीब 1102 शराब दुकानों को तत्काल राहत मिली है, जिनके बंद होने का खतरा मंडरा रहा था।
हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को बताया था सर्वोपरि
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सख्त फैसला सुनाते हुए कहा था कि सड़क सुरक्षा राजस्व से ऊपर है। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नगर निगम या स्थानीय निकाय की सीमा में आने वाले हाईवे पर भी 500 मीटर के दायरे में कोई शराब की दुकान नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया था।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शीर्ष अदालत अपने पूर्व निर्णयों में स्पष्ट कर चुकी है कि नगर निकाय सीमा के भीतर स्थित हाईवे पर 500 मीटर की बाध्यता लागू नहीं होती। सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।
राजस्व नुकसान का भी दिया गया हवाला
राज्य सरकार ने यह भी तर्क रखा कि यदि हाईकोर्ट का आदेश लागू रहता, तो राज्य को लगभग 2100 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का नुकसान होता। साथ ही यह भी बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में हाईवे अक्सर मुख्य सड़कों का रूप ले लेते हैं, जहां ग्रामीण इलाकों की तुलना में यातायात और सुरक्षा नियम अलग होते हैं।
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फिलहाल 1102 दुकानें रहेंगी चालू
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम स्टे के बाद अब शहरी निकाय सीमा के भीतर स्थित करीब 1102 शराब की दुकानें फिलहाल बंद नहीं होंगी। मामले में सुप्रीम कोर्ट आगे विस्तृत सुनवाई करेगा, तब तक इन दुकानों का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा।
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