Census- जाति गणना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से इनकार

By Anuj Kumar | Updated: February 2, 2026 • 8:53 PM

नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने नागरिकों की जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई से मना कर दिया। यह याचिका शिक्षाविद् आकाश गोयल (Akash Goyal) की ओर से दायर की गई थी।

केंद्र और जनगणना आयुक्त को सुझावों पर विचार की छूट

हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय से कहा कि वे याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार कर सकते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

पारदर्शिता और प्रश्नपत्र सार्वजनिक करने की मांग

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता (Mukta Gupta) ने दलील दी कि 2027 की जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जाति संबंधी विवरण दर्ज करने, वर्गीकरण और सत्यापन के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रश्नपत्र सार्वजनिक किया जाए, ताकि भ्रम और त्रुटियों से बचा जा सके।

जनगणना प्रक्रिया कानून के तहत संचालित: कोर्ट

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि जाति संबंधी आंकड़ों की पहचान के लिए कोई पूर्व-निर्धारित पैमाना मौजूद नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बनाए गए 1990 के नियमों के अनुसार संचालित होती है। ये नियम संबंधित प्राधिकारियों को जनगणना की विधि और प्रक्रिया तय करने का अधिकार देते हैं।

प्राधिकारियों पर भरोसा, विशेषज्ञों की मदद से बनेगी व्यवस्था

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास ऐसा कोई ठोस कारण नहीं है, जिससे यह माना जाए कि प्राधिकारी याचिकाकर्ता या अन्य लोगों की चिंताओं की अनदेखी करेंगे। उन्होंने कहा कि जनगणना जैसे बड़े और संवेदनशील कार्य के लिए प्राधिकारी संभवतः विशेषज्ञों की मदद से मजबूत व्यवस्था तैयार करेंगे।

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16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी 2027 की गणना

पीठ ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा महापंजीयक को सौंपे गए प्रतिवेदन में कुछ प्रासंगिक मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2027 की जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी। यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक जातिगत गणना को शामिल करेगी और साथ ही भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी।

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