Supreme Court street dogs case : देशभर में आवारा कुत्तों की समस्या और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में Supreme Court ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, National Highways Authority of India और Animal Welfare Board of India समेत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया गया। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने पक्षकारों को एक सप्ताह में लिखित दलीलें दाखिल करने का समय दिया है।
सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के नसबंदी (Supreme Court street dogs case) केंद्रों की संख्या को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आईं। पशु कल्याण बोर्ड ने बताया कि देशभर में केवल 76 मान्यता प्राप्त केंद्र हैं, जबकि राज्यों ने 883 केंद्र होने का दावा किया है। इस अंतर और फंड के उपयोग को लेकर अदालत ने चिंता जताई और लंबित मान्यता आवेदनों का समयबद्ध निपटारा करने के निर्देश दिए।
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मामले में कुत्ता प्रेमियों, डॉग बाइट पीड़ितों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की दलीलों पर भी अदालत ने गौर किया। सुनवाई का फोकस एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के पालन, आम जनता की सुरक्षा और जानवरों के साथ मानवीय व्यवहार पर रहा।
इससे पहले अगस्त 2025 में दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में भेजने के आदेश पर काफी विवाद हुआ था। मौजूदा पीठ ने उन निर्देशों में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि कुत्तों को हटाने के बजाय ABC नियमों के तहत टीकाकरण और नसबंदी कर उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाए। अब अंतिम फैसले को लेकर सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।
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