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Latest Hindi News : दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- गलती अमीरों की, मार गरीबों पर

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: December 16, 2025 • 12:29 PM
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और सांसों पर मंडराते खतरे के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर कड़ी टिप्पणी की। सर्वोच्च अदालत (Supreme court) ने साफ कहा कि हालात नहीं सुधरने की एक बड़ी वजह आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन न होना और संपन्न वर्ग का अपनी जीवनशैली में बदलाव न करना है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि नियम तोड़े जा रहे हैं, लेकिन उसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

आदेशों के बावजूद नहीं सुधरे हालात

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुलस एम पंचोली शामिल थे, ने यह टिप्पणियां प्रदूषण मामले की संक्षिप्त सुनवाई के दौरान कीं। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) अब भी गंभीर स्तर पर बना हुआ है और इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए कई निर्देशों के बावजूद बनी हुई है।

जमीनी स्तर पर कार्रवाई धीमी

अपराजिता सिंह ने कहा कि अदालत के आदेशों और तय प्रोटोकॉल (Protocol) के अनुसार कार्रवाई अक्सर धीमी रहती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई आदेश पारित किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर समाधान क्या है और कहा कि ऐसे व्यवहारिक आदेशों की जरूरत है, जिनका वास्तविक रूप से पालन हो सके।

संपन्न वर्ग को बदलनी होगी जीवनशैली

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग अपनी जीवनशैली में बदलाव करें। संपन्न वर्ग अक्सर प्रतिबंधों को नजरअंदाज करता है और डीजल कारों, निजी जेनरेटर और प्रदूषण फैलाने वाले अन्य साधनों का इस्तेमाल जारी रखता है। अदालत ने विशेष रूप से वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई और कहा कि इससे राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों का दम घुट रहा है।

गरीब और मजदूर वर्ग पर सबसे ज्यादा असर

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर गरीब, मजदूर और कामकाजी वर्ग पर पड़ता है, जिनके पास न तो सुरक्षित विकल्प होते हैं और न ही प्रदूषण से बचाव के पर्याप्त साधन। अदालत ने संकेत दिया कि यदि समाज के हर वर्ग, खासकर संपन्न तबके ने जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो केवल आदेशों से हालात नहीं सुधरेंगे

सबसे पावरफुल जज कौन है?

सुप्रीम कोर्ट में सबसे बड़ा पद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का होता है. हाल ही में जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें चीफ जस्टिस बने हैं, उन्होंने जस्टिस बीआर गवई की जगह ली.

सुप्रीम कोर्ट में कितने ब्राह्मण जज हैं?

2023 की नियुक्तियों के साथ, ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान 33 न्यायाधीशों (न्यायालय का 36.4 प्रतिशत) में से कम से कम 12 ब्राह्मण समुदायों से आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, ब्राह्मण भारत की जनसंख्या का लगभग पाँच प्रतिशत हैं।

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