चेन्नई,। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी चरम पर पहुंच चुकी है और सभी प्रमुख दल मतदाताओं को साधने में जुटे हैं। इस बीच राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सक्रियता ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर प्रधानमंत्री (Narendra Modi) लगातार दौरे कर चुनावी माहौल को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।
मोदी का आक्रामक प्रचार अभियान
पिछले दो महीनों में पीएम मोदी तीन बार तमिलनाडु (Tamilnadu) का दौरा कर चुके हैं और सहयोगी दलों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। उनका यह अभियान जारी रहने वाला है और 15 अप्रैल को वह नागरकोइल में एनडीए (NDA) उम्मीदवारों के समर्थन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे।
राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर सवाल
दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में एक भी रैली नहीं की है। उनकी इस दूरी ने कांग्रेस और डीएमके गठबंधन के भीतर मतभेद की अटकलों को हवा दे दी है।
2021 चुनाव से अलग नजर आ रहा रुख
राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति की तुलना 2021 विधानसभा चुनाव से कर रहे हैं, जब राहुल गांधी ने चुनाव से पहले ही सक्रिय प्रचार शुरू कर दिया था। इस बार उनकी देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुडुचेरी में दिखी दूरी
हाल ही में Puducherry में भी दोनों दलों के बीच दूरी साफ नजर आई। राहुल गांधी ने अपने भाषण में डीएमके या उसके अध्यक्ष M. K. Stalin का जिक्र नहीं किया, जबकि उसी दिन स्टालिन भी वहां मौजूद थे।
कार्यक्रमों में टकराव से बचाव
दिलचस्प बात यह रही कि दोनों नेताओं के कार्यक्रम इस तरह तय किए गए कि उनका आमना-सामना न हो। राहुल गांधी ने सुबह प्रचार किया, जबकि स्टालिन शाम को पहुंचे। स्टालिन ने भी अपने भाषण में राहुल का नाम नहीं लिया।
सीट बंटवारे को लेकर खींचतान की चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दूरी सीट बंटवारे को लेकर हुई खींचतान का परिणाम हो सकती है। हालांकि, डीएमके ने इसे महज कार्यक्रमों का संयोग बताया है और कहा है कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ नजर आएंगे।
अन्य पढ़े : iran hadid 110 : हदीद-110 से अमेरिका और इजरायल को चुनौती
राहुल के जल्द दौरे की संभावना
कांग्रेस की ओर से संकेत दिया गया है कि राहुल गांधी 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच सकते हैं, जिससे गठबंधन की स्थिति साफ हो सकेगी।
Read More :