मुंबई । बीएमसी चुनाव के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ आ गए हैं।बुधवार को मुंबई में उद्धव-राज ठाकरे संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन का ऐलान किया। बीएमसी ही नहीं बल्कि दूसरे नगर निगमों में भी शिवसेना (UBT) और मनसे मिलकर चुनावी किस्मत आजमाएंगे। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक सुर में कहा कि हमारी सोच एक है और हम दोनों भाई भी एक साथ हैं। उद्धव ने आगे कहा कि मुंबई को तोड़ने की कोशिश हो रही है। मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं होने देंगे।
ठाकरे परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि
उद्धव और राज ठाकरे रिश्ते में चचेरे भाई हैं। दोनों नेता एक ही मंच पर मराठी मानुस के लिए आवाज उठाते थे, लेकिन बाल ठाकरे ने अपने सियासी वारिस के तौर पर उद्धव को बढ़ाया। 2005 में राज ठाकरे शिवसेना से अलग हो गए और 2006 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (Manse) बना ली। 2006 से लेकर अभी तक उद्धव और राज अपनी अलग-अलग सियासत कर रहे थे, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीतिक हालत बदल गई। उद्धव के राइटहैंड माने जाने वाले एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को अपने कब्जे में ले लिया।
बीएमसी चुनाव: उद्धव का आखिरी किला
बीएमसी का चुनाव उद्धव के लिए अपना आखिरी किला बचाने की लड़ाई है। उद्धव ठाकरे (Udhav Thakrey) ने गठबंधन की घोषणा करते हुए कहा, “हमारी सोच एक है। हमें मराठियों का संघर्ष और उनका बलिदान याद है। आज हम दोनों भाई साथ खड़े हैं और आगे भी साथ रहेंगे।” उद्धव ने आगे कहा, “दिल्ली में बैठे लोग हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार हमें टूटना नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो यह हमारे पूर्वजों के बलिदान का अपमान होगा।”
राज ठाकरे ने कहा, “मराठी मानूस किसी को परेशान नहीं करता, लेकिन अगर कोई मराठी मानूस को परेशान करता है तो फिर वह किसी को नहीं छोड़ता। मैंने पहले ही कहा था कि महाराष्ट्र किसी भी निजी झगड़े से बड़ा है। आज हम दोनों भाई साथ आए हैं। सीटों का बंटवारा हमारे लिए मायने नहीं रखता। अगला मेयर मराठी होगा और हमारा होगा।”
पवार परिवार में भी बिखराव
ठाकरे परिवार की तरह ही 2023 में पवार परिवार भी दो धड़ों में बंट गया है। शरद पवार के छत्रछाया में भतीजे अजित पवार ने राजनीतिक तरीके सीखा, लेकिन 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया। अजित पवार ने एनसीपी के 40 विधायकों के साथ बीजेपी से हाथ मिला लिया। इससे पवार परिवार दो हिस्सों में बंट गया। अजित पवार महायुति सरकार में डिप्टी सीएम हैं और उनकी पार्टी के कई नेता फडणवीस कैबिनेट में मंत्री हैं।
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नगर निगम चुनावों में गठबंधन की तलाश
बीएमसी सहित राज्य के बाकी नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने अजित पवार से किनारा कर लिया है। अजित पवार नगर निगम चुनाव में सहारा तलाश रहे हैं, जिसके लिए वे शरद पवार की एनसीपी से लेकर कांग्रेस तक से गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ पर फोकस
अजित पवार पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री पिछले तीन दिनों से पुणे में हैं और दोनों गुटों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।सुप्रिया सुले ने पुणे नगर निगम चुनाव में गठबंधन पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अभी कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।
पिछला चुनाव और रणनीति
2017 के पुणे नगर निगम चुनावों में बीजेपी को 97 सीटें मिली थीं, एनसीपी 39 सीटें, शिवसेना 10, कांग्रेस 9, मनसे 2, एआईएमआईएम 1 और अपक्ष 4 सीटें। अजित पवार इस बार पुणे में बीजेपी के खिलाफ अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
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