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UP- अयोध्या राम मंदिर के वंशीपहाड़पुर पत्थरों से बन रहा देश का पहला संत रविदास मंदिर

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 1, 2026 • 9:53 AM
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सागर । अयोध्या धाम के भगवान श्रीराम लला मंदिर (Sri Ram Lala Mandir) में उपयोग हुए राजस्थान के धौलपुर स्थित वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से अब देश का पहला भव्य संत रविदास मंदिर आकार ले रहा है। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले में 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह मंदिर 66 फीट ऊंचा होगा और पूरी तरह पत्थरों से निर्मित किया जा रहा है। खास बात यह है कि मंदिर के गर्भगृह में किसी भी प्रकार के लोहे का उपयोग नहीं किया जाएगा।

101 करोड़ की परियोजना, पीएम मोदी ने किया था भूमि पूजन

कलेक्टर संदीप आर ने बताया कि संत रविदास जयंती (Ravidas Jayanti) के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने 101 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास मंदिर और संग्रहालय के निर्माण की घोषणा की थी। इस परियोजना का भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। मंदिर निर्माण की निगरानी केंद्र और राज्य सरकार लगातार कर रही हैं।

भक्ति आंदोलन और सामाजिक समानता का संदेश

कलेक्टर ने बताया कि 12वीं-13वीं शताब्दी में चले भक्ति आंदोलन में संत रविदास का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने जाति भेद का विरोध करते हुए समानता और कर्म की प्रधानता पर बल दिया। संत रविदास को ‘संत शिरोमणि’ की उपाधि प्राप्त है और वे रैदास के नाम से भी जाने जाते हैं।

12 एकड़ में बनेगा संत रविदास मंदिर और संग्रहालय परिसर

यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 12 एकड़ भूमि में विकसित किया जा रहा है। मंदिर नागर शैली में बनाया जा रहा है, जिसमें गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप शामिल होंगे। यह स्थान सिर्फ पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चर्चाओं का केंद्र भी बनेगा।

भव्य जलकुंड और आधुनिक संग्रहालय

मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने भव्य जलकुंड बनाया जा रहा है, जिसमें सुंदर नक्काशी और मूर्तियां होंगी। इसके चारों ओर हरियाली विकसित की जाएगी। संग्रहालय में चार गैलरियां होंगी, जहां संत रविदास के जीवन, भक्ति आंदोलन, सामाजिक योगदान और साहित्य को आधुनिक तकनीक से दर्शाया जाएगा।

पुस्तकालय और संगत सभाखंड भी होंगे आकर्षण

परिसर में 10 हजार वर्गफुट में पुस्तकालय और संगत सभाखंड का निर्माण किया जा रहा है। यहां संत रविदास सहित अन्य संतों, दार्शनिकों और आध्यात्मिक साहित्य का विशाल संग्रह उपलब्ध रहेगा। संगत सभाखंड फूलों की पंखुड़ियों के आकार का होगा, जहां व्याख्यान, संगोष्ठी और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

भक्त निवास और अल्पाहार गृह की सुविधा

देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए 12,500 वर्गफुट में भक्त निवास बनाया जा रहा है। इसमें एसी कमरे, छात्रावास और सभी जरूरी सुविधाएं होंगी। साथ ही 15 हजार वर्गफुट में विशाल अल्पाहार गृह भी तैयार किया जा रहा है।

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निर्माण कार्य तेज, 25 प्रतिशत काम पूरा

पर्यटन विभाग के सहायक अभियंता मनीष डेहरिया ने बताया कि निर्माण एजेंसी यूनिट इंजिवेंचर कंसोर्टियम एलएलपी (नोएडा) द्वारा अब तक करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। मंदिर का फाउंडेशन कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि संग्रहालय, भक्त निवास और अन्य संरचनाओं का निर्माण तेजी से जारी है।

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