National: कोर्ट ने कार्टूनिस्ट को 10 दिन में माफीनामा देने का आदेश दिया

By digital | Updated: August 19, 2025 • 4:30 PM

19 अगस्त 2025: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने के मामले में इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)से राहत मिली है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मालवीय को 10 दिनों के भीतर अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम, पर माफीनामा प्रकाशित करने का आदेश दिया

साथ ही, कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया। यह मामला 2021 में फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक कार्टून से जुड़ा है, जिसमें आरएसएस और पीएम मोदी को अपमानजनक तरीके से दर्शाया गया था।

क्या है विवाद?

मालवीय के खिलाफ मई 2025 में इंदौर के लसूड़िया पुलिस स्टेशन में एक स्थानीय वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, मालवीय का कार्टून आरएसएस के एक व्यक्ति को खाकी शॉर्ट्स में नीचे झुके हुए और पीएम मोदी को स्टेथोस्कोप और सिरिंज के साथ इंजेक्शन देते हुए दिखाता था।

इस पोस्ट में भगवान शिव के बारे में भी कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियाँ थीं, जिसे कोर्ट ने “अपमानजनक” और “सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक” माना। मालवीय पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (सामाजिक सौहार्द के खिलाफ कार्य), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), धारा 352 (जानबूझकर अपमान), और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए (अश्लील सामग्री प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।

मालवीय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की माँग की थी, लेकिन 3 जुलाई को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि मालवीय का कार्टून “स्वतंत्र अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग” है और यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाता है। इसके बाद मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और टिप्पणियाँ

14 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सुधांशु धूलिया और अरविंद कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने मालवीय के कार्टून को “बुरे स्वाद” वाला और “स्वतंत्र अभिव्यक्ति का दुरुपयोग” करार दिया। जस्टिस धूलिया ने टिप्पणी की, “50 साल की उम्र में भी उनमें परिपक्वता नहीं है।

लोग सोशल मीडिया पर कुछ भी कह देते हैं।” कोर्ट ने मालवीय के वकील वृंदा ग्रोवर से पूछा, “वे ऐसा क्यों करते हैं?” ग्रोवर ने दलील दी कि कार्टून 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था और यह वैक्सीन की प्रभावशीलता पर सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा था। उन्होंने कहा, “यह आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं है।”

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