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National : उत्तराखंड में आपदाओं की बढ़ती चुनौती, कारण खोजेंगे वैज्ञानिक

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: August 24, 2025 • 2:36 PM
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देहरादून । उत्तराखंड में बार-बार आ रही प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने थराली, सैजी (पौड़ी) और धराली क्षेत्रों में हाल ही में आई आपदाओं को देखते हुए यह फैसला लिया।

समिति करेगी गहन अध्ययन

सीएम धामी ने कहा कि समिति में राज्य और केंद्र की प्रतिष्ठित एजेंसियों के वैज्ञानिक शामिल होंगे। वे पिछले वर्षों के आंकड़ों और वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण कर आपदाओं के पैटर्न को समझेंगे। लक्ष्य यह होगा कि भविष्य में आपदाओं की संभावना को कम किया जा सके और बेहतर आपदा प्रबंधन तैयार हो।

बादल फटने से घायल, मौसम विभाग का अलर्ट

थराली में हाल ही में बादल फटने से घायल छह लोगों को हेलिकॉप्टर (Helicopter) से एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। इस बीच मौसम विभाग ने राज्य में अगले दो दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

जिलाधिकारियों को सतर्कता के निर्देश

सीएम धामी ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर आपदा प्रबंधन सामग्री और उपकरण पहले से उपलब्ध रखे जाएं। साथ ही राहत और पुनर्वास कार्य में तेजी लाई जाए। बेघर लोगों को तत्काल आश्रय, बिजली, पानी और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं जल्द से जल्द बहाल की जाएं।

आपदा प्रबंधन नीति में होगा सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर सरकार अपनी आपदा प्रबंधन नीतियों में सुधार करेगी। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिलेगी कि आखिर उत्तराखंड में बार-बार आपदाएं क्यों आती हैं और भविष्य में उनके प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है

उत्तराखंड में कुल कितने जिले हैं?

उत्तराखंड राज्य में कुल 13 जिले हैं, जिन्हें दो मंडलों में विभाजित किया गया है: गढ़वाल मंडल में 7 जिले और कुमाऊँ मंडल में 6 जिले हैं. 

उत्तराखंड में आपदा कब आई थी?

जून 2013 में, उत्तर भारतीय राज्य उत्तराखंड में दोपहर के समय बादल फटने से विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन हुआ, जो 2004 की सुनामी के बाद देश की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा बन गई।

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