Bihar- पूर्वी चंपारण में विराट रामायण मंदिर में स्थापित हुआ विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग

By Anuj Kumar | Updated: January 17, 2026 • 2:06 PM

बिहार के पूर्वी चंपारण (East Champaran) जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर (Virat Ramayan Temple) परिसर में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। यहां विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। 33 फुट ऊंचा और करीब 210 टन वजनी यह विशाल शिवलिंग देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में आस्था और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार और धर्माचार्यों के अनुष्ठान के बीच इसे मंदिर परिसर में स्थापित किया गया, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

एक ही पत्थर से तैयार हुआ अद्भुत शिवलिंग

इस भव्य शिवलिंग को ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ नाम दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया है। इस अद्वितीय शिल्प को आकार देने में करीब 10 वर्ष का समय लगा। इतनी विशाल संरचना को एक ही पत्थर से गढ़ना अपने आप में कारीगरों की असाधारण कला और धैर्य का प्रतीक है।

वैदिक अनुष्ठान के साथ हुई अधिष्ठापना

17 जनवरी 2026 को वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ इस शिवलिंग को 18 फीट ऊंचे पेडेस्टल और 15 फीट की मजबूत आधार संरचना पर अधिष्ठापित किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संत, महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का माहौल देखने को मिला।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हुए शामिल

इस पावन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी विराट रामायण मंदिर पहुंचे। उन्होंने पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेकर प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

जानिए ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ का अर्थ

आचार्य शिवानन्द ब्रह्मचारी उर्फ वाचस्पति मिश्र ने ‘सहस्त्र शिव लिंगम’ के आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए बताया कि इसका अर्थ है हजारों शिवलिंग। यह भगवान शिव के अनंत स्वरूप, ब्रह्मांड की विशालता और उनकी निराकार सत्ता का प्रतीक है। ‘सहस्त्र’ शब्द हजार की संख्या को दर्शाता है, जबकि शिवलिंग सृजन, शक्ति और परम सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित है।

बिहार के लिए गौरव का क्षण

आचार्य शिवानन्द ब्रह्मचारी ने कहा कि यह सम्पूर्ण बिहार के लिए अत्यंत गौरव और आस्था का क्षण है। चंपारण की पावन भूमि पर देवाधिदेव महादेव का ‘सहस्त्र’ रूप में अधिष्ठापन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बिहार को धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाएगा।

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