Uttar Pradesh : एक दूल्हा ऐसा भी, दहेज में मिले 31 लाख रुपये लौटाए

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सिर्फ भगवान की फोटो और नारियल किया स्वीकार

एक अनोखी शादी ने समाज में मिसाल पेश की, जब दूल्हे ने दहेज में दिए गए 31 लाख रुपये वापस लौटा दिए। उन्होंने केवल भगवान की फोटो और नारियल स्वीकार कर विवाह संपन्न किया। इस कदम की सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर खूब सराहना हो रही है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक युवक ने शादी में मिली 31 लाख (31 lakh) रुपये की दहेज लौटाकर समाज के सामने मिसाल पेश की. उसने कहा कि उसके लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज है. दूल्हे ने केवल लक्ष्मी-गणेश का फोटो और नारियल स्वीकार किया

आज के दौर में जहां शादियों में दिखावा और भारी-भरकम दहेज सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मान लिया गया है, वहीं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक युवक ने अपनी शादी में मिसाल कायम कर दी है. युवक का नाम सौरभ राणा (Saurabh Rana) है, जोकि पेश से वकील है. इस युवक मे शादी में एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी खूब सराहना हो रही है

19 फरवरी को सौरभ राणा की बारात हरियाणा के यमुनानगर स्थित सौभाग्य रिसॉर्ट पहुंची थी. पूरे रीति-रिवाजों के बीच विवाह समारोह संपन्न हो रहा था. इसी दौरान गोरे (तिलक) की रस्म निभाई जा रही थी. परंपरा के अनुसार लड़की वालों की ओर से शगुन स्वरूप 31 लाख रुपये भेंट करने की तैयारी की गई थी. रस्म के दौरान जैसे ही यह राशि सौरभ राणा के सामने रखी गई, उन्होंने हाथ जोड़कर विनम्रता के साथ इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया. वहां मौजूद सभी लोग पहले तो हैरान रह गए, लेकिन जब सौरभ ने अपने निर्णय का कारण बताया, तो माहौल भावुक हो उठा।

‘दुल्हन ही सबसे बड़ी दहेज’

सौरभ राणा ने कहा, ‘मेरे लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा दान और दहेज है. मुझे धन या संपत्ति की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि एक शिक्षित, संस्कारी और समझदार जीवनसाथी चाहिए था, जो मुझे मिल चुका है.’ उनकी दुल्हन प्रीति ने एम.कॉम. की पढ़ाई पूरी की है. सौरभ का कहना था कि उनका जीवनसाथी ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और वास्तविक संपत्ति है।

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अपने इस निर्णय से सौरभ ने न केवल दहेज प्रथा का खुलकर विरोध किया, बल्कि वधू पक्ष का सम्मान भी पूरी तरह बनाए रखा. उन्होंने शगुन स्वरूप केवल लक्ष्मी-गणेश का फोटो और नारियल स्वीकार किया और पूरा कैश लौटा दिया।

तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा मंडप

सौरभ के इस कदम से विवाह स्थल पर मौजूद लोग भावुक हो उठे. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सभी ने उनके निर्णय का स्वागत किया. कई लोगों ने इसे एक साहसी पहल बताया. सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में सौरभ राणा के इस फैसले की बड़ी तारीफ हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिक्षित युवा इसी तरह आगे आकर दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं, तो समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है।

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Surekha Bhosle

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Surekha Bhosle

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