5 मिनट की मीटिंग और ‘गेट आउट’ का आरोप
नई दिल्ली: बुधवार सुबह दिल्ली में डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा। TMC का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने उन्हें केवल 5 मिनट का समय दिया और उनके साथ “अपमानजनक” व्यवहार करते हुए बाहर जाने को कह दिया। डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग को चुनौती दी है कि यदि वे झूठ बोल रहे हैं, तो आयोग बैठक का ऑडियो या वीडियो फुटेज जारी करे। वहीं, आयोग के सूत्रों का कहना है कि TMC प्रतिनिधिमंडल का व्यवहार अनुचित था और वे अधिकारियों पर चिल्ला रहे थे।
वोटर लिस्ट से 91 लाख नामों का कटना (SIR मुद्दा)
विवाद की असली जड़ SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया है। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 11.85% है। विशेष रूप से बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों जैसे नॉर्थ 24 परगना में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। TMC इसे विपक्षी दलों को निशाना बनाने की साजिश बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह पारदर्शी प्रक्रिया है और इस बार बंगाल में चुनाव “भयमुक्त और हिंसा मुक्त” होंगे।
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विपक्ष की एकजुटता और ‘बीजेपी’ के इशारे का आरोप
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब सीधे भाजपा के निर्देशों पर काम कर रहा है। आज शाम 4:45 बजे कांग्रेस, सपा, आरजेडी और शिवसेना (UBT) सहित कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। चुनाव आयोग के सोशल मीडिया पोस्ट “दो टूक” को लेकर भी विवाद है, जिसे विपक्ष ने एक संवैधानिक संस्था के लिए “अमर्यादित भाषा” करार दिया है।
SIR प्रक्रिया क्या है और बंगाल में इतने बड़े पैमाने पर नाम क्यों हटाए गए?
SIR यानी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ मतदाता सूची को शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है। चुनाव आयोग के अनुसार, मृत, स्थानांतरित या फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, TMC का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और विशिष्ट समुदायों के 91 लाख वोटरों को जानबूझकर निशाना बनाया गया है ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
चुनाव आयोग ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर क्या स्टैंड लिया?
चुनाव आयोग ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ा संदेश पोस्ट करते हुए कहा कि बंगाल में इस बार चुनाव “भय रहित और हिंसा रहित” होंगे। इस पर TMC और अन्य विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि आयोग एक निष्पक्ष संस्था के बजाय एक राजनीतिक पार्टी की तरह भाषा का इस्तेमाल कर रहा है।
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