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National- 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस, डिजिटल पेमेंट होगा अनिवार्य

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 22, 2026 • 10:35 AM
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नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल से सरकार टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी में है। अब टोल टैक्स वसूली की प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल बनाया जाएगा, जिससे यात्रियों को फास्टैग (Fastag) और यूपीआई (UPI) जैसे माध्यमों से भुगतान करना होगा।

फास्टैग और यूपीआई पर रहेगा जोर

मौजूदा नियमों के अनुसार यदि वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या वह काम नहीं कर रहा है, तो दोगुना टोल वसूला जाता है। वहीं यूपीआई से भुगतान करने पर वाहन की श्रेणी के अनुसार 1.25 गुना शुल्क लिया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, यूपीआई भुगतान की सुविधा नवंबर में नकद लेनदेन कम करने के विकल्प के रूप में शुरू की गई थी। शुरुआत में इसका हिस्सा कुल टोल कलेक्शन का करीब 2 प्रतिशत था। अब नकद भुगतान में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

ओवरलोडिंग पेनल्टी भी होगी डिजिटल

सरकार ओवरलोडिंग के मामलों में लगने वाली पेनल्टी को भी डिजिटल मोड (Digital Mode) में लाने पर विचार कर रही है। फिलहाल यह भुगतान अधिकतर नकद में होता है। कैशलेस पेनल्टी प्रणाली लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रक्रिया आसान होगी।

एनएचएआई का उद्देश्य: दक्षता और पारदर्शिता

National Highways Authority of India (एनएचएआई) के अनुसार, इस प्रस्तावित कदम का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को और मजबूत बनाना है। इससे टोल प्लाजा संचालन में दक्षता और भरोसे में वृद्धि होगी।

जाम और लंबी कतारों से मिलेगी राहत

सरकार का मानना है कि नकद भुगतान में अधिक समय लगता है—राशि गिनने, छुट्टा देने और रसीद काटने में देरी होती है। इससे टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लग जाती हैं। डिजिटल भुगतान से वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे, जिससे जाम की समस्या कम होगी। एक अध्ययन के अनुसार, डिजिटल टोलिंग से देश को सालाना करीब 87,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। साथ ही ईंधन की बचत और समय की बचत भी होगी।

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भविष्य में बैरियर-फ्री टोलिंग की तैयारी

सरकार आगे चलकर बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस व्यवस्था में वाहन की रफ्तार कम किए बिना ही टोल अपने आप कट जाएगा। इसके लिए पूरी तरह कैशलेस प्रणाली जरूरी मानी जा रही है। डिजिटल टोलिंग से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि टोल चोरी और लेनदेन संबंधी विवादों पर भी रोक लगेगी।

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