USA- डोनाल्ड ट्रंप 2.0 की मार, एक साल में 75% घटे भारतीय छात्र, रोजगार पर खतरा

By Anuj Kumar | Updated: January 21, 2026 • 11:12 AM

नई दिल्ली । अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरे कार्यकाल का पहला वर्ष अत्यधिक चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों के नामांकन में इस वर्ष लगभग 75 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। दशकों में यह पहला अवसर है जब शिक्षा के क्षेत्र में इतनी तीव्र गिरावट देखी गई है, जिसने वैश्विक शिक्षा बाजार और हजारों युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

75% गिरावट: भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना हुआ मुश्किल

इस संकट की मुख्य वजह वीजा रिजेक्शन (अस्वीकृति) दरों में वृद्धि, इंटरव्यू स्लॉट की अत्यधिक कमी और छात्रों के बीच व्याप्त अनिश्चितता का माहौल है। अगस्त से अक्टूबर के बीच, जो आमतौर पर छात्रों के अमेरिका जाने का पीक सीजन होता है, वहां जाने वाले भारतीयों की संख्या में 70 प्रतिशत से अधिक की कमी आई। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वही छात्र अमेरिका पहुंच सके जिन्होंने अपनी आवेदन प्रक्रिया बहुत पहले, यानी फरवरी या मार्च तक पूरी कर ली थी।

वीजा प्रक्रिया हुई और सख्त, सोशल मीडिया तक हो रही जांच

वीजा जांच की प्रक्रिया को भी पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया गया है। अब छात्रों की सोशल मीडिया गतिविधियों तक को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। हैदराबाद (Hyderabad) और बेंगलुरु स्थित विदेशी शिक्षा सलाहकारों के अनुसार, टॉप-40 अमेरिकी संस्थानों में प्रवेश पाने वाले मेधावी छात्र भी अब वीजा रद्द होने के डर से आवेदन करने में संकोच कर रहे हैं। कई छात्रों ने अपना दाखिला जनवरी के स्प्रिंग सेशन तक के लिए टाल दिया था, लेकिन वहां भी सीमित स्लॉट और कड़ी सुरक्षा जांच के कारण उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

पहले से पढ़ रहे छात्रों पर भी गिरा संकट का साया

संकट केवल नए छात्रों तक सीमित नहीं है। अमेरिका (America) में पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों पर भी गाज गिरी है। अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक लगभग 8,000 सक्रिय स्टूडेंट वीजा (एफ-1) रद्द कर दिए गए। कई मामलों में वीजा रद्द करने का आधार पुराने और छोटे कानूनी मामले, जैसे ओवरस्पीडिंग के चालान को बनाया गया।

एच-1बी वीजा: IT पेशेवरों की नौकरी पर तलवार

इसके अलावा, पेशेवर क्षेत्र में एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर भी तलवार लटकी हुई है। भारी-भरकम फीस लगाने और नियमों को और सख्त करने के प्रस्तावों ने आईटी सेक्टर के पेशेवरों को डरा दिया है, जिनमें 72 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं।

नौकरी बाजार में सुस्ती, ऑफर वापस लेने का सिलसिला

आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति अनुकूल नहीं है। अमेरिकी जॉब मार्केट में आई सुस्ती के कारण कई कंपनियों ने नए छात्रों की ऑनबोर्डिंग टाल दी है और नौकरी के प्रस्ताव तक वापस ले लिए हैं।

वर्क परमिट एक्सटेंशन खत्म: भारतीयों में बढ़ी चिंता

होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा वर्क परमिट के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन को खत्म करने के फैसले ने वहां रह रहे भारतीयों की रातों की नींद उड़ा दी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि भारतीय दूतावासों में मदद के लिए आने वाली कॉल्स की संख्या कई गुना बढ़ गई है।

अन्य पढ़े: Rajasthan- सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हाईवे किनारे शराब दुकानें बंद नहीं होंगी

अमेरिका अब भारतीयों के लिए एक कठिन विकल्प

दशकों से अमेरिका में बस चुके भारतीय भी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सख्त वीजा नीतियों, बढ़ते डिपोर्टेशन और अनिश्चित जॉब मार्केट ने मिलकर अमेरिका को भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए एक कठिन विकल्प बना दिया है।

Read More :

# Latest news #America Job Market News #America news #Breaking News in Hindi #Donald Trump news #Hindi News #Hyderabad News #Latest news