Umar Khalid bail denied : 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छात्र नेताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी भूमिका अन्य आरोपियों से “गुणात्मक रूप से अलग” है।
142 पन्नों के विस्तृत फैसले में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया ने कहा कि अभियोजन सामग्री के अनुसार खालिद और इमाम कथित साजिश के वैचारिक, रणनीतिक और समन्वयक स्तर पर शामिल थे, जबकि अन्य आरोपी केवल स्थानीय स्तर पर निर्देशों के क्रियान्वयन तक सीमित थे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए के तहत जमानत तय करते समय भूमिका की गंभीरता, भागीदारी का स्तर और कानूनी मानक महत्वपूर्ण होते हैं, न कि केवल समानता या जेल में बिताया गया समय।
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अदालत ने यह भी कहा कि साजिश के मामलों में (Umar Khalid bail denied) आरोपी की दंगों के स्थल पर भौतिक उपस्थिति आवश्यक नहीं है। यदि अभियोजन सामग्री प्रथम दृष्टया यह दिखाती है कि आरोपी योजना, तैयारी और रणनीति से जुड़ा था, तो जमानत से इनकार किया जा सकता है।
कोर्ट के अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम को कथित तौर पर आंदोलन की समय-सीमा, रणनीति और विभिन्न स्थलों के बीच समन्वय स्थापित करने वाला बताया गया है, जिससे वे केवल सहायक भूमिका में नहीं बल्कि केंद्रीय भूमिका में आते हैं।
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