Vrindavan : वृंदावन हादसा-10 पर्यटकों की मौत, 5 अभी लापता

Read Time:  1 min
वृंदावन
वृंदावन
FONT SIZE
GET APP

मथुरा के वृंदावन में नाव हादसे में 10 की मौत हो चुकी है। अब तक 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। अभी 5 लोग लापता हैं। शनिवार को दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आर्मी समेत 250 लोगों की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है। 14 किमी के दायरे में लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

लापता लोग अभी तक क्यों नहीं मिल रहे हैं? इस सवाल पर रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) में जुटे अफसर ने बताया कि यमुना नदी का बहाव तेज है, इसलिए लोग बहकर काफी दूर जा सकते हैं। इसके अलावा, नदी के अंदर गाद (कीचड़) और रेत में शव दबे हो सकते हैं। 24 घंटे बाद शव फूलकर ऊपर आ सकते हैं।

हादसा शुक्रवार दोपहर 3 बजे केसी घाट पर हुआ

हादसा शुक्रवार दोपहर 3 बजे केसी घाट (KC Ghat) पर हुआ, जहां 37 श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई थी। घाट बांके बिहारी मंदिर से करीब 2 किमी दूर है। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं।

जिस जगह हादसा हुआ, वहां 25 फीट गहरा पानी है। शुरुआती जांच से पता चला है कि नाव की क्षमता 40 श्रद्धालुओं की थी। किसी भी श्रद्धालु को नाविक ने लाइफ जैकेट नहीं दी थी। पांटून पुल की रिपेयरिंग कर रहे लोगों और अन्य नाविकों ने कुछ लोगों को बचाया। बाद में प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू शुरू किया।

 वृंदावन

पुलिस ने आरोपी नाविक पप्पू निषाद को हादसे के 6 घंटे बाद यानी रात 9 बजे हिरासत में लिया। नाव उसकी खुद की थी। उसने श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था। हादसे के बाद फरार हो गया था।

हादसे से जुड़े 2 वीडियो सामने आए हैं। पहला- नाव डूबने से 15 मिनट पहले का है। इसमें लोग राधे-राधे का जप कर रहे हैं। दूसरा- श्रद्धालुओं के नदी में डूबने का है।

कैसे हुआ हादसा?

हादसे में जिंदा बचे युवक ने बताया- नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। तेज हवा के कारण नाव अचानक डगमगाने लगी। नाविक का नियंत्रण छूट गया।

अन्य पढ़े: Kadapa crime news : प्यार ठुकराने पर नाबालिग लड़की की हत्या

पर्यटकों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, नाव रोक लीजिए, लेकिन उसने नहीं सुनी। दो बार नाव पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार टक्कर हो गई और नाव डूब गई।

सभी श्रद्धालु शुक्रवार सुबह वृंदावन पहुंचे थे

गुरुवार (9 अप्रैल) को लुधियाना के जगराओं स्थित श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से 2 बसों में 130 श्रद्धालुओं को ले जाया गया था। इनमें से 90 श्रद्धालु जगराओं से थे और बाकी अन्य शहरों से। यह वृंदावन की 4 दिन की यात्रा थी।

मृतकों में मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं।

अन्य पढ़े:

Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।