National- जल संकट की चेतावनी, 2030 तक 40% आबादी को झेलनी पड़ सकती है किल्लत

By Anuj Kumar | Updated: March 14, 2026 • 12:02 PM

नई दिल्ली । देश के बड़े शहरों में पानी की कमी अब गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, भूजल के अत्यधिक दोहन और कमजोर जल प्रबंधन के कारण महानगरों में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। (NITI Aayog) की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत की करीब 40 प्रतिशत आबादी को पर्याप्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और भी कठिन हो सकते हैं।

बड़े शहरों में बढ़ती पानी की किल्लत

देश के कई प्रमुख शहर जैसे Delhi, Kolkata, Chennai, Bengaluru और (Hyderabad) जल संकट से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में लोगों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर है कि लोगों को पानी भरने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है।

संकट के पीछे ये हैं मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार शहरी जल संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। अनियंत्रित भूजल दोहन के कारण जमीन के नीचे का जलस्तर लगातार गिर रहा है। इसके अलावा शहरों में जल आपूर्ति का ढांचा पुराना और जर्जर है, जिससे पाइपलाइन लीकेज के कारण बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ चला जाता है। झीलों और तालाबों के खत्म होने तथा तेजी से फैलते शहरी क्षेत्रों ने भी समस्या को और गंभीर बना दिया है।

शोध में सुझाया गया नया मॉडल

समाधान के तौर पर (Stanford University) के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में नया मॉडल सुझाया है, जो Earth’s Future जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें Pune के उदाहरण के आधार पर बताया गया है कि यदि किसानों को अतिरिक्त सिंचाई जल को नियंत्रित टैंकर नेटवर्क के जरिए शहरों में बेचने की अनुमति दी जाए, तो शहरी जल आपूर्ति में सुधार हो सकता है। अध्ययन के अनुसार कुल जल आपूर्ति में केवल एक प्रतिशत की वृद्धि से भी प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 40 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।

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2050 तक वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा संकट

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मौजूदा स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वर्ष 2050 तक दुनिया के लगभग आधे शहर जल संकट का सामना कर सकते हैं। अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में कम आय वाले शहरी परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल पानी खरीदने पर खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और बेहतर प्रबंधन ही इस समस्या से निपटने का स्थायी रास्ता माना जा रहा है।

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