नई दिल्ली। दुनिया में मृत्युदंड का उपयोग लगातार घट रहा है, फिर भी कुछ देशों में यह अब भी कानून और राजनीति दोनों का हिस्सा बना हुआ है। वर्ष 2024 में केवल 15 देशों में 1,518 फांसियाँ दी गईं—जो 2015 के बाद सबसे अधिक हैं—लेकिन इसके बावजूद लगभग 70% देशों ने मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। कई बार यह सजा राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) और सत्ता संघर्ष से जुड़ी मानी जाती है। शेख हसीना का मामला भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। इतिहास में ऐसे कई नेता रहे हैं जिन्हें शासनकाल के दमन, भ्रष्टाचार या हिंसा के कारण मृत्यु दंड भुगतना पड़ा।
सद्दाम हुसैन (इराक): तानाशाही का हिंसक अंत
इराक पर 1979 से 2003 तक शासन करने वाले सद्दाम हुसैन को कुर्द समुदाय पर रासायनिक हमलों और दमनकारी नीतियों के लिए कुख्यात माना जाता है। 2003 में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार होने के बाद 1982 के दजैल नरसंहार मामले में उन्हें फांसी की सजा दी गई। 30 दिसंबर 2006 को उनकी फांसी का वीडियो लीक होने के बाद वैश्विक बहस छिड़ गई।
मुअम्मर गद्दाफी (लीबिया): विद्रोह की आग में अंत
1969 से 2011 तक लीबिया पर लोहे की मुट्ठी से शासन करने वाले गद्दाफी ने तेल संपदा का इस्तेमाल अपनी सत्ता मजबूत करने में किया। 2011 के अरब स्प्रिंग के दौरान उनका शासन ढह गया। सिरते में पकड़े जाने पर विद्रोहियों ने बिना मुकदमे के उनकी हत्या कर दी। कानूनी फांसी न सही, पर यह एक प्रत्यक्ष मृत्युदंड ही साबित हुआ।
चार्ल्स टेलर (लायबेरिया): ब्लड डायमंड्स का काला इतिहास
लायबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर को 2012 में युद्ध अपराधों और ब्लड डायमंड्स से जुड़े आरोपों में दोषी पाते हुए 50 साल की सजा सुनाई गई। यह मृत्युदंड नहीं था, लेकिन उम्रकैद के समान माना जाता है।
परवेज मुशर्रफ (पाकिस्तान): गैर-हाजिर में सुनाई गई सजा
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को 2019 में राजद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई—वह भी उनकी अनुपस्थिति में। वे उस समय दुबई में थे, इसलिए सजा लागू नहीं हो सकी। 2023 में उनका वहीं निधन हो गया। हसीना के मामले से यह समानता महत्वपूर्ण है कि दोनों को देश से बाहर रहते हुए सजा सुनाई गई।
जुल्फिकार अली भुट्टो (पाकिस्तान, 1979): विवादों में घिरी सजा
हत्या की साजिश के आरोप में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार भुट्टो को 1979 में रावलपिंडी में फांसी दी गई। यह सजा आज भी पाकिस्तान के इतिहास की सबसे विवादित सजाओं में गिनी जाती है।
निकोलस चाउशेस्कु (रोमानिया): साम्यवादी साम्राज्य का अंत
1965 से 1989 तक रोमानिया पर शासन करने वाले चाउशेस्कु को भ्रष्टाचार और जनता पर अत्याचार के आरोपों में अपराधी ठहराया गया। 1989 की क्रांति में सत्ता खोने के बाद त्वरित मुकदमे में उन्हें मौत की सजा दी गई और 25 दिसंबर 1989 को गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह दुनिया का पहला ऐसा फांसी ट्रायल था जिसे टीवी पर दिखाया गया।
विदकुन क्विस्लिंग (नॉर्वे): इतिहास का कुख्यात गद्दार
नाजी जर्मनी की मदद से नॉर्वे पर कब्जा करवाने वाले विदकुन क्विस्लिंग को 1945 में राजद्रोह के मामले में फांसी दी गई। उनका नाम आज “क्विस्लिंग” शब्द में बदल चुका है, जिसका अर्थ है ‘देशद्रोही’।
क्या शेख हसीना हिंदू हैं?
परिचय हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को पूर्वी बंगाल के तुंगीपारा के बंगाली मुस्लिम शेख परिवार में हुआ था। उनके पिता बंगाली राष्ट्रवादी नेता शेख मुजीबुर रहमान थे और उनकी माँ बेगम फाजिलतुन्नेस मुजीब थीं।
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