नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर और मन में कई तरह के बदलाव आते हैं। यह समय हर महिला के लिए बेहद खास और संवेदनशील होता है। ऐसे में सही तरीके से किया गया योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) ने गर्भवती महिलाओं को ट्राइमेस्टर (Trymestor) के अनुसार योग करने की सलाह दी है।
पहले ट्राइमेस्टर में हल्के योग और प्राणायाम जरूरी
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार गर्भावस्था का पहला ट्राइमेस्टर शुरुआती बदलावों का समय होता है। इस दौरान शरीर धीरे-धीरे नई स्थिति में ढलता है, इसलिए हल्के योग को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस चरण में गर्दन घुमाना, कंधों और टखनों की हल्की एक्सरसाइज उपयोगी मानी जाती है। इसके अलावा ताड़ासन, वृक्षासन, दंडासन, सुखासन और शवासन जैसे सरल आसन किए जा सकते हैं। प्राणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम तनाव कम करने और मानसिक शांति देने में सहायक होते हैं। ध्यान और शांति पाठ भी मन को स्थिर रखने में मदद करते हैं।
दूसरे ट्राइमेस्टर में बढ़ाया जा सकता है योग अभ्यास
दूसरा ट्राइमेस्टर गर्भावस्था का अपेक्षाकृत आरामदायक समय माना जाता है। इस दौरान शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है, इसलिए योग अभ्यास को थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। इस चरण में ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन और कटी चक्रासन जैसे आसन लाभकारी होते हैं। बैठकर किए जाने वाले आसनों में बद्धकोणासन, शशांकासन और मार्जरी आसन उपयोगी हैं। दीवार के सहारे किया गया विपरीत करणी आसन और शवासन शरीर को आराम देने में मदद करता है। साथ ही उज्जायी प्राणायाम सांसों को नियंत्रित रखने और मानसिक शांति के लिए उपयोगी माना जाता है।
तीसरे ट्राइमेस्टर में रखें विशेष सावधानी
तीसरा ट्राइमेस्टर गर्भावस्था का सबसे संवेदनशील चरण होता है। इस समय शरीर भारी महसूस होता है और थकान जल्दी होती है, इसलिए योग बेहद हल्का और सुरक्षित होना चाहिए।इस दौरान ताड़ासन, त्रिकोणासन, उपविष्ट कोणासन और सुखासन जैसे सरल आसन किए जा सकते हैं। सुप्त बद्धकोणासन और शवासन शरीर को आराम देते हैं। प्राणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम तनाव कम करने में मदद करते हैं। साथ ही ओम ध्यान और सो-हम ध्यान मानसिक स्थिरता प्रदान करते हैं।
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आयुष मंत्रालय की अहम सलाह
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था में योग करते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या दबाव नहीं होना चाहिए। जितना शरीर सहज महसूस करे, उतना ही अभ्यास करना सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।
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