रोहित-कोहली के ग्रेड में हो सकती है कटौती
स्पोर्ट्स डेस्क: BCCI अपने सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के मौजूदा ढांचे को सरल बनाने पर विचार कर रहा है। चयन समिति के चेयरमैन अजीत अगरकर के नेतृत्व में एक प्रस्ताव(Proposal) दिया गया है, जिसमें वर्तमान के चार ग्रेड (A+, A, B, C) को बदलकर केवल तीन श्रेणियों (A, B, C) में समेटने की बात कही गई है। इस नए मॉडल का सबसे बड़ा आधार ‘फॉर्मैट भागीदारी’ को बनाया गया है। यानी जो खिलाड़ी क्रिकेट के तीनों फॉर्मैट (टेस्ट, वनडे और टी-20) खेलेंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि केवल एक या दो फॉर्मैट खेलने वाले खिलाड़ियों को निचले ग्रेड में रखा जा सकता है।
रोहित और कोहली पर असर: A+ से B ग्रेड का सफर
इस प्रस्तावित बदलाव(BCCI) का सबसे ज्यादा असर सीनियर खिलाड़ियों(Senior Players) पर पड़ने की संभावना है। विराट कोहली और रोहित शर्मा, जो फिलहाल ₹7 करोड़ वाले A+ ग्रेड में हैं, अब केवल वनडे फॉर्मैट में सक्रिय हैं (दोनों ने टेस्ट और टी-20 से संन्यास ले लिया है)। नए नियमों के तहत, सिर्फ एक फॉर्मैट खेलने के कारण इन दोनों दिग्गजों को सीधे B ग्रेड में भेजा जा सकता है। यह फैसला ठीक वैसा ही हो सकता है जैसा 2019 में एमएस धोनी के साथ हुआ था, जब टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के बाद उन्हें टॉप ब्रैकेट से बाहर कर दिया गया था।
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विमेंस क्रिकेट और पे-पैरिटी की ओर कदम
पुरुषों के साथ-साथ महिला क्रिकेटरों के कॉन्ट्रैक्ट और फीस पर भी एपेक्स(BCCI) काउंसिल की बैठक में चर्चा होनी है। वर्तमान में महिला टीम के पास केवल तीन ग्रेड (A, B, C) हैं, जिनमें अधिकतम सैलरी ₹50 लाख है। हाल ही में महिला टीम की वनडे वर्ल्ड कप जीत के बाद उनकी मैच फीस और रिटेनरशिप बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। बोर्ड का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही ‘पे-पैरिटी’ (समान वेतन) की मुहिम को घरेलू स्तर और सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में भी और अधिक मजबूती से लागू करना है।
BCCI के प्रस्तावित नए कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में खिलाड़ियों की ग्रेडिंग किस आधार पर तय होगी?
नए सिस्टम में ग्रेडिंग मुख्य रूप से इस बात(BCCI) पर निर्भर करेगी कि खिलाड़ी खेल के कितने फॉर्मैट में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। जो खिलाड़ी टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों फॉर्मैट खेलते हैं, उन्हें उच्चतम ग्रेड (A) में जगह मिलेगी। वहीं, रोहित और कोहली जैसे खिलाड़ी जो अब केवल एक फॉर्मैट (वनडे) खेल रहे हैं, उन्हें ग्रेड B में रखा जा सकता है।
क्या इस बदलाव से खिलाड़ियों की कुल कमाई पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा?
हां, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की रिटेनरशिप राशि में अंतर होता है (जैसे वर्तमान में A+ को ₹7 करोड़ और B को ₹3 करोड़ मिलते हैं)। हालांकि, खिलाड़ी मैच फीस और विज्ञापनों से भी बड़ी कमाई करते हैं, लेकिन बोर्ड की रिटेनरशिप राशि उनके ग्रेड के हिसाब से कम हो जाएगी।
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