‘गौतम गंभीर कोच नहीं, टीम मैनेजर के रूप में अधिक प्रभावी’
स्पोर्ट्स डेस्क: पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव(Kapil Dev) ने ‘कोच’ शब्द के आधुनिक उपयोग पर असहमति जताई है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी खिलाड़ी को खेल की बारीकियां (जैसे लेग स्पिन या विकेटकीपिंग) सिखाना हेड कोच(Head Coach) का काम नहीं है, क्योंकि खिलाड़ी पहले से ही स्थापित होते हैं। कपिल देव के अनुसार, गौतम गंभीर जैसे दिग्गजों की भूमिका एक ‘कोच’ से कहीं ज्यादा एक ‘टीम मैनेजर’ की है, जिसका प्राथमिक कार्य मैदान के बाहर की रणनीतियों और खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को संभालना है।
साउथ अफ्रीका में हार और गंभीर की आलोचना
साउथ अफ्रीका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज(Test Series) में भारत की 0-2 से हार के बाद हेड कोच गौतम गंभीर की कोचिंग शैली सवालों के घेरे में है। आलोचक उनकी रोटेशन पॉलिसी और टीम चयन के फैसलों पर उंगली उठा रहे हैं। कपिल देव(Kapil Dev) ने इस संदर्भ में कहा कि मैनेजमेंट की असली परीक्षा तब होती है जब टीम संघर्ष कर रही हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक अच्छे मैनेजर का काम खिलाड़ियों की तकनीक सुधारने के बजाय उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी जीत सकते हैं।
अन्य पढ़े: एशेज एडिलेड टेस्ट: एलेक्स कैरी का शानदार शतक
‘मैन मैनेजमेंट’ और खराब फॉर्म से निपटने का मंत्र
कपिल देव(Kapil Dev) ने अपने कप्तानी के अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक सफल लीडर वही है जो सफल खिलाड़ियों के बजाय उन पर ध्यान दे जो खराब फॉर्म से जूझ रहे हों। उनके अनुसार, शतक बनाने वाले खिलाड़ी को किसी सहारे की जरूरत नहीं होती, लेकिन शून्य पर आउट होने वाले खिलाड़ी को कप्तान और मैनेजमेंट के साथ की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि गंभीर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं में आत्मविश्वास भरना और उन्हें यह महसूस कराना है कि पूरी टीम उनके साथ खड़ी है।
कपिल देव ने गौतम गंभीर को कोच के बजाय ‘मैनेजर’ कहना क्यों पसंद किया?
उन्होंने(Kapil Dev) का तर्क है कि ‘कोच’ वह होता है जो स्कूल या कॉलेज स्तर पर खेल की बुनियादी तकनीक सिखाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी पहले से ही अनुभवी होते हैं, इसलिए वहां तकनीक सिखाने से ज्यादा जरूरी उन्हें ‘मैनेज’ करना, उनकी मानसिकता को संभालना और टीम के माहौल को सकारात्मक बनाए रखना होता है।
टीम इंडिया के हेड कोच के रूप में गौतम गंभीर के सामने वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों का आत्मविश्वास फिर से हासिल करना है, खासकर साउथ अफ्रीका में हार के बाद। उन्हें टीम में संतुलन बनाने, रोटेशन पॉलिसी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने और सीनियर व जूनियर खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल (मैन मैनेजमेंट) बैठाने की जरूरत है, जैसा कि कपिल देव ने सुझाव दिया है।
अन्य पढ़े: