Olympics: ओलंपिक 2028 से नया नियम

By Dhanarekha | Updated: March 27, 2026 • 3:13 PM

महिला वर्ग में अब केवल बायोलॉजिकल फीमेल्स

स्पोर्ट्स डेस्क: इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी(Olympics) ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक से ट्रांसजेंडर महिलाओं के महिला वर्ग में खेलने पर रोक लगा दी है। अब केवल वही एथलीट महिला कैटेगरी में हिस्सा ले सकेंगी जो जन्म से ही महिला हैं। इसके लिए ‘SRY जीन स्क्रीनिंग’ (Gene Test) को अनिवार्य किया गया है, ताकि लिंग की पुष्टि वैज्ञानिक रूप से की जा सके। यह नियम मुख्य रूप से उन एथलीटों पर लागू होगा जो जन्म के समय पुरुष थे और बाद में महिला बने

वैज्ञानिक आधार और निष्पक्षता का तर्क

IOC ने इस प्रतिबंध के पीछे शारीरिक श्रेष्ठता का हवाला दिया है। रिसर्च के अनुसार, जन्म से पुरुष होने के कारण एथलीटों को ताकत, सहनशक्ति (Endurance) और पावर में प्राकृतिक रूप से बढ़त मिलती है, जो हार्मोनल बदलावों के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होती। IOC अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री(Olympics) का मानना है कि ओलंपिक जैसे मंच पर, जहाँ जीत-हार का अंतर बहुत मामूली होता है, बायोलॉजिकल पुरुषों का महिलाओं के साथ मुकाबला करना खेल की निष्पक्षता के खिलाफ है।

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विवादों का इतिहास और DSD एथलीटों पर असर

यह फैसला पेरिस ओलंपिक 2024 में इमान खलीफ और लिन यू-टिंग के जेंडर विवाद के बाद आया है, जिन्होंने मुक्केबाजी में गोल्ड मेडल जीते थे। नया नियम न केवल ट्रांसजेंडर एथलीटों, बल्कि ‘डिफरेंस ऑफ सेक्स डेवलपमेंट’ (DSD) वाले खिलाड़ियों पर भी लागू होगा, जिनके पास सामान्य महिला(Olympics) क्रोमोसोम नहीं हैं। दक्षिण अफ्रीका की धावक कास्टर सेमेन्या जैसे खिलाड़ी इससे सीधे प्रभावित होंगे। हालांकि, जो एथलीट जन्म से महिला हैं लेकिन अब खुद को ट्रांसजेंडर पुरुष मानते हैं, वे महिला स्पर्धाओं में खेलना जारी रख सकते हैं।

क्या 2028 ओलंपिक में जेंडर टेस्ट अनिवार्य होगा?

हाँ, नए नियमों के अनुसार सभी महिला एथलीटों को एक बार ‘SRY जीन स्क्रीनिंग’ करानी होगी। यह टेस्ट थूक, ब्लड सैंपल या गाल के स्वैब के जरिए किया जा सकता है ताकि जन्मजात लिंग की पुष्टि हो सके।

क्या यह नियम सभी खेलों पर लागू होगा?

यह नियम केवल प्रोफेशनल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ओलंपिक खेलों पर लागू होगा। जमीनी स्तर (Grassroot) के खेलों पर फिलहाल इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

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