Payal Nag: पायल नाग का चमत्कार

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विश्व चैंपियन को हराकर जीता स्वर्ण पदक

बैंकॉक: बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारत ने 7 स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर तालिका(Payal Nag) में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब 18 वर्षीय पायल नाग ने विश्व की नंबर-1 तीरंदाज और चैंपियन शीतल देवी को 139-136 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह सीनियर कैटेगरी(Senior Category) में पायल का पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण है। उनकी इस अद्भुत क्षमता को देखते हुए खुद शीतल देवी ने उन्हें ‘इंडियाज मिरेकल आर्चर’ का नाम दिया है

संघर्षों से उपजा अटूट हौसला

पायल की जीवन यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण(Challenging) रही है। 2015 में एक दुर्घटना में अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवाने के बाद, उन्हें समाज के तानों और तिरस्कार का सामना करना पड़ा। यहाँ तक कि उन्हें अनाथालय तक भेज दिया गया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें(Payal Nag) हार न मानना सिखाया। हाथ न होने पर पायल ने पहले मुंह से लिखना और स्केचिंग सीखी। आर्चरी में आने से पहले उन्होंने माउथ-पेंटिंग में राज्य स्तर पर गोल्ड जीतकर यह साबित कर दिया था कि प्रतिभा किसी शारीरिक अंग की मोहताज नहीं होती।

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अनोखी तकनीक और कोच का साथ

पायल की तीरंदाजी की तकनीक दुनिया के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। वे अपने प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को मजबूती से थामती हैं, दांतों से स्ट्रिंग को खींचती हैं और अपने कंधे के दबाव से सटीक निशाना लगाती हैं। कटरा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोच कुलदीप वेदवान ने उनकी इस अनोखी प्रतिभा को पहचाना और उसे सही दिशा दी। आज उनकी यही तकनीक और एकाग्रता उन्हें दुनिया के बेहतरीन पैरा-आर्चर्स की कतार में खड़ा करती है।

पायल नाग को ‘इंडियाज मिरेकल आर्चर’ क्यों कहा जाता है?

उसके दोनों हाथ और पैर नहीं हैं। वे अपने नकली (प्रोस्थेटिक) पैरों से धनुष पकड़ती हैं और दांतों से खींचकर निशाना लगाती हैं। उनकी इस अविश्वसनीय और कठिन तकनीक के कारण उन्हें यह नाम दिया गया है।

वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?

भारतीय टीम ने इस सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में पहला स्थान प्राप्त किया। भारत ने कुल 16 पदक जीते, जिनमें 7 गोल्ड, 5 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।

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