గుజరాత్‌పై ఢిల్లీ ఘనవిజయం.. ఫైనల్లో ఆర్సీబీతో ఢీ టీమిండియా ప్లేయింగ్ 11 ప్రకటించిన చాహల్ టీ20 వరల్డ్ కప్ లో పాల్గొంటున్న జట్లన్నీ ప్రమాదకరమైనవే: ధోనీ పాక్ డ్రామా’ క్రికెట్‌కు నష్టం, ఐపీఎల్‌కే లాభం లలిత్ మోదీ సంచలనం! టీ20 వరల్డ్ కప్ 2026 సాంగ్ వచ్చేసింది నేషనల్ కబడ్డీలో విజేతగా హర్యానా టీమిండియా ఘన విజయం బీసీసీఐతో గూగుల్ ఏఐ ఒప్పందం వరుసగా 6 మ్యాచులు గెలిచిన ఏకైక జట్టు విరాట్ కోహ్లీ సరికొత్త రికార్డు గుజరాత్‌పై ఢిల్లీ ఘనవిజయం.. ఫైనల్లో ఆర్సీబీతో ఢీ టీమిండియా ప్లేయింగ్ 11 ప్రకటించిన చాహల్ టీ20 వరల్డ్ కప్ లో పాల్గొంటున్న జట్లన్నీ ప్రమాదకరమైనవే: ధోనీ పాక్ డ్రామా’ క్రికెట్‌కు నష్టం, ఐపీఎల్‌కే లాభం లలిత్ మోదీ సంచలనం! టీ20 వరల్డ్ కప్ 2026 సాంగ్ వచ్చేసింది నేషనల్ కబడ్డీలో విజేతగా హర్యానా టీమిండియా ఘన విజయం బీసీసీఐతో గూగుల్ ఏఐ ఒప్పందం వరుసగా 6 మ్యాచులు గెలిచిన ఏకైక జట్టు విరాట్ కోహ్లీ సరికొత్త రికార్డు

Team Management: टीम मैनेजमेंट की बेरुखी और धोनी का साथ

Author Icon By Dhanarekha
Updated: April 4, 2026 • 4:19 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

युवराज सिंह के संन्यास की अनकही कहानी

स्पोर्ट्स डेस्क: 2011 वर्ल्ड कप के नायक युवराज सिंह ने खुलासा किया है कि उनके करियर(Team Management) के अंतिम दौर में तत्कालीन कप्तान विराट कोहली, कोच रवि शास्त्री या नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) की ओर से उन्हें भविष्य को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी गई थी। युवी ने बताया कि जब वे टीम से अंदर-बाहर हो रहे थे, तब उन्हें काफी उपेक्षित महसूस कराया गया। अंततः महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें फोन पर सच्चाई बताते हुए स्पष्ट किया कि चयनकर्ता(Selector) अब युवाओं की ओर देख रहे हैं और वे भविष्य की योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। इसी स्पष्टता के बाद युवराज ने 10 जून 2019 को संन्यास का फैसला लिया

फिटनेस का दबाव और निजी टिप्पणियों का दर्द

युवराज ने मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें ‘यो-यो टेस्ट’ के नाम पर डराकर संन्यास लेने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई थी। इसके अलावा, उन्होंने कमेंट्री से अपनी दूरी का कारण बताते हुए कहा कि वे उन लोगों के साथ काम नहीं करना चाहते जिन्होंने उनके खेल के बजाय उनके व्यक्तित्व पर निजी (पर्सनल) हमले किए थे। युवराज के अनुसार, खेल की आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन निजी टिप्पणियों को भूलना आसान नहीं होता।

अन्य पढ़े: क्रिकेट के साथ गोल्फ भी खेलें, तनाव रहेगा दूर- युवराज सिंह

एक युग का अंत: 19 साल का बेमिसाल सफर

साल 2000 में डेब्यू करने वाले युवराज सिंह का करियर उपलब्धियों से भरा रहा। वे 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप की जीत के सबसे बड़े सूत्रधार थे। इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में 6 छक्के और 12 गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात देकर मैदान पर वापसी करने वाले इस योद्धा ने भारत के लिए 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 11,000 से अधिक रन बनाए।

युवराज सिंह ने संन्यास के लिए महेंद्र सिंह धोनी को ही क्यों श्रेय दिया?

युवराज के अनुसार, जब टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ता उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे थे, तब केवल धोनी ने ही उन्हें ईमानदारी से बताया कि सिलेक्टर्स अब उनके नाम पर विचार नहीं कर रहे हैं। इसी सच्चाई ने उन्हें संन्यास लेने का मानसिक आधार दिया।

कैंसर से वापसी के बाद युवराज का प्रदर्शन कैसा रहा?

वापसी के बाद युवराज पहले जैसी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे। 2011 के बाद उन्होंने 30 वनडे मैचों में केवल एक शतक लगाया और उनकी गेंदबाजी की धार भी कम हो गई थी। उन्होंने वापसी के बाद वनडे में करीब 27 और टी-20 में 25 की औसत से रन बनाए।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #CricketRetirement #Google News in Hindi #Hindi News Paper #MSDhoni #TeamIndia #ViratKohli #WorldCupHero #YuvrajSingh

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.