हैदराबाद। साइबराबाद ट्रैफिक पुलिस (CTP) ने सप्ताहांत पर विशेष ड्रंक एंड ड्राइव जांच अभियान चलाया, जिसमें कुल 138 आरोपियों को पकड़ा गया। कुल मामलों में 121 दोपहिया वाहन चालक, 5 तीनपहिया, 11 चारपहिया तथा 1 भारी वाहन चालक शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साइबराबाद पुलिस ने दोहराया कि शराब पीकर वाहन चलाना एक गंभीर अपराध है। यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में वाहन चलाते हुए किसी घातक दुर्घटना (Accident) का कारण बनता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इस धारा के अंतर्गत अधिकतम 10 वर्ष की सजा और जुर्माना का प्रावधान है। पिछले सप्ताह (23 मार्च से 28 मार्च) के दौरान कुल 403 ड्रंक एंड ड्राइव मामलों का न्यायालय में निपटारा किया गया, जिनमें सभी 403 व्यक्तियों पर केवल जुर्माना लगाया गया।
नशे में गाड़ी चलाने पर कौन सी धारा लगती है?
ऐसे मामलों में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 लागू होती है। इसके तहत शराब या नशे की हालत में वाहन चलाना अपराध माना जाता है और जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या जेल की सजा हो सकती है। दुर्घटना होने पर अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
नशे में गाड़ी चलाने का शब्द क्या है?
इसे आम तौर पर “ड्रंक ड्राइविंग” कहा जाता है। यह स्थिति तब होती है जब कोई व्यक्ति शराब या नशे के प्रभाव में वाहन चलाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
कौन सी शराब आदमी को बिस्तर पर ज्यादा देर तक टिकाती है?
ऐसी कोई सुरक्षित या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित शराब नहीं है जो इस तरह का प्रभाव दे। वास्तव में अधिक शराब पीने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है और शारीरिक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना अधिक जरूरी माना जाता है।
नशे में गाड़ी चलाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है क्योंकि यह को प्रभावित करता है?
ऐसी स्थिति में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र प्रभावित होते हैं। निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिक्रिया समय और संतुलन कमजोर हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण व्यक्ति खुद के साथ-साथ दूसरों के लिए भी जोखिम पैदा करता है, इसलिए इससे बचना आवश्यक है।
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