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POCSO : पास्को मामले में आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 20, 2026 • 11:27 AM
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हैदराबाद। रामगोपालपेट पुलिस स्टेशन को एक पुराने POCSO मामले में बड़ी सफलता मिली है। अदालत ने 2019 के बाल यौन शोषण मामले में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला हैदराबाद सिटी पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावी कार्यवाही (effective action) का परिणाम बताया जा रहा है। यह मामला पास्को केस के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें 11 वर्षीय बच्चे के साथ गंभीर अपराध हुआ था। घटना 29 अक्टूबर 2019 की है, जब पीड़ित बच्चा जलविहार क्षेत्र के पास से ऑटो-रिक्शा में रानीगंज जाने के लिए बैठा था। आरोपी ने रास्ता बदलकर उसे बतुकम्मा कुंटा क्षेत्र के पास रेलवे ट्रैक के किनारे झाड़ियों में ले जाकर अपराध (Crime) को अंजाम दिया। विरोध करने पर आरोपी ने बच्चे को गंभीर रूप से घायल भी किया।

बाल यौन शोषण मामले में विशेष अदालत का ऐतिहासिक फैसला

स्थानीय लोगों की सतर्कता से आरोपी को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था। इसके बाद पीड़ित की मां की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। आरोपी की पहचान अब्दुल रहमान के रूप में हुई, जो उस समय ऑटो चालक था। मामले की सुनवाई विशेष पास्को सत्र न्यायालय में हुई। न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास और 6,000 का जुर्माना तथा पीड़ित को 75,000 का मुआवजा की सजा सुनाई।

डीसीपी रक्षिता कृष्णमूर्ति ने जांच टीम के प्रयासों की सराहना की। जांच की शुरुआत तत्कालीन इंस्पेक्टर थोटा चेंचला बाबू ने की थी, जब वर्तमान एसएचओ बी. सुरेश कुमार ने मामले की कोर्ट मॉनिटरिंग की। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष सहायक लोक अभियोजक ए. रामादेवी और अतिरिक्त लोक अभियोजक के. प्रताप रेड्डी ने मजबूत दलीलें पेश कीं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और पास्को मामलों में सख्त न्याय व्यवस्था का उदाहरण है।

पास्को में कितने साल की सजा होती है?

अपराध की गंभीरता और मामले की परिस्थितियों के आधार पर सजा तय की जाती है। बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में कुछ अपराधों के लिए कई वर्षों की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान हो सकता है। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाती है। गंभीर मामलों में कठोर दंड और जुर्माना दोनों लगाए जा सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून में सख्त प्रावधान रखे गए हैं।

पास्को का मतलब क्या होता है?

पॉक्सो अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इसका पूरा नाम “प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट” है। यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों पर लागू होता है। बच्चों की सुरक्षा, त्वरित जांच और न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इसे लागू किया गया था। इसमें पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का भी प्रावधान है।

पास्को एक्ट में कौन-कौन सी धाराएं लगती हैं?

मामले की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग कानूनी धाराएं लागू की जाती हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, अश्लील सामग्री दिखाना, गंभीर यौन हमला और बच्चों के शोषण से संबंधित प्रावधान शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां घटना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित धाराएं जोड़ती हैं। कई मामलों में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी साथ में लगाई जा सकती हैं। अदालत अपराध की गंभीरता के अनुसार कार्रवाई करती है।

पास्को एक्ट में जमानत कैसे होती है?

गंभीरता को देखते हुए अदालत जमानत पर फैसला करती है। आरोपी को जमानत देने से पहले न्यायालय मामले के साक्ष्य, पीड़ित की सुरक्षा और अपराध की प्रकृति पर विचार करता है। कई गंभीर मामलों में जमानत आसानी से नहीं दी जाती। पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलें भी अदालत के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिया जाता है।

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