Jathara : मेडारम में रिकॉर्ड तोड़ 3 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद – सीतक्का

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 13, 2026 • 10:33 PM

जातरा को लेकर मंत्रियों ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की

हैदराबाद। अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं ट्रांसजेंडर कल्याण मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार (Adluri Lakshman Kumar) और पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री सीतक्का (Sitakka) ने कहा कि 28 से 31 जनवरी तक आयोजित होने वाली मेदारम सम्मक्का-सरलम्मा जातरा में लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि श्रद्धालुओं को सुचारु अनुभव प्रदान करने के लिए सभी सरकारी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए। दोनों मंत्रियों ने मंगलवार को सचिवालय में मेडारम जातरा को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।

पिछले वर्ष इस उत्सव में आए थे 1.5 करोड़ श्रद्धालु

बैठक में मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव, विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार और साब्यसाची घोष, अतिरिक्त डीजी विजय कुमार और स्वाति लकड़ा, विभिन्न विभागों के सचिव, मुलुगु जिला कलेक्टर दिवाकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष इस उत्सव में 1.5 करोड़ श्रद्धालु आए थे और 2026 के आयोजन के लिए सरकार लगभग 150 करोड़ रुपये के बड़े बजट के साथ व्यापक तैयारियां कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक होगी। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि सम्मक्का-सरलम्मा जातरा का आयोजन असाधारण रूप से किया जाए और इसे कुंभ मेले से भी बेहतर बनाया जाए, जिससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

जातरा आयोजन के लिए कुल 251 करोड़ रुपये किए आवंटित

उन्होंने कहा कि हर अधिकारी को इस आयोजन की सफलता की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मंत्री सीतक्का ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के जातरा आयोजन के लिए कुल 251 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें 150 करोड़ रुपये सामान्य व्यवस्थाओं के लिए और 101 करोड़ रुपये वेदियों (आल्टर) के नवीनीकरण के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए। इस अवसर पर मंत्रियों सीतक्का और लक्ष्मण कुमार ने मुख्य सचिव रामकृष्ण राव के साथ मिलकर मुलुगु जिला प्रशासन द्वारा विकसित विशेष लोगो, मोबाइल ऐप और प्रचार वीडियो का शुभारंभ भी किया।

मेडाराम मंदिर का इतिहास क्या है?

तेलंगाना के मुलुगु जिले के घने जंगलों में स्थित मेडाराम मंदिर आदिवासी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मंदिर समक्का-सरक्का नामक वीरांगनाओं को समर्पित है, जिन्होंने काकतीय शासकों के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया था। सदियों से यहां आदिवासी समुदाय प्रकृति और शक्ति की पूजा के रूप में इन देवियों की आराधना करता आ रहा है। यह स्थल किसी भव्य इमारत के बजाय जंगल, नदी और पवित्र प्रतीकों से जुड़ा हुआ है, जो इसकी विशिष्ट पहचान बनाता है।

मेडाराम जतारा कितने दिन का है?

चार दिनों तक चलने वाला मेडाराम जतारा विश्व का सबसे बड़ा आदिवासी मेला माना जाता है। यह उत्सव हर दो वर्ष में माघ पूर्णिमा के आसपास आयोजित किया जाता है। इन चार दिनों में समक्का, सरक्का, नागुलम्मा और पम्पलम्मा की प्रतीकात्मक पूजा होती है। देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहां आकर गुड़, चावल और नारियल चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

सम्मक्का सरक्का की असली कहानी क्या है?

किवदंतियों और लोक कथाओं के अनुसार समक्का एक आदिवासी रानी थीं और सरक्का उनकी पुत्री थीं। काकतीय शासकों द्वारा लगाए गए कर और अत्याचार के विरोध में दोनों ने अपने समुदाय के साथ संघर्ष किया। युद्ध के दौरान वे जंगलों में लुप्त हो गईं और बाद में देवी के रूप में पूजी जाने लगीं। आदिवासी समाज उन्हें अन्याय के खिलाफ संघर्ष, बलिदान और साहस का प्रतीक मानता है, इसी कारण मेडाराम जतारा उनकी स्मृति में आयोजित किया जाता है।

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