हैदराबाद। संक्रांति त्योहार के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने चार विशेष ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है। ये ट्रेनें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रमुख गंतव्यों को जोड़ेंगी। एससीआर के अधिकारियों के अनुसार ट्रेन संख्या 07484 (विजयवाड़ा–गुंतकल) विजयवाड़ा से 16 जनवरी को शाम 7.00 बजे प्रस्थान कर गुंतकल अगले दिन सुबह 4.30 बजे पहुंचेगी। इस ट्रेन का गुंटूर, नरसाराओपेट, विनुकोंडा, दोनकोंडा, मरकापुर रोड, कुंबुम, नांदयाल और दोने में ठहराव होगा। स्लीपर एवं जनरल सेकंड क्लास कोच रहेंगे। इसी तरह ट्रेन संख्या 07485 (मछलीपट्टनम–धर्मावरम) मछलीपट्टनम (Machilipatnam) से 16 जनवरी को शाम 6.00 बजे रवाना होकर धर्मावरम अगले दिन सुबह 6.30 बजे पहुंचेगी।
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ेंगी स्पेशल सेवाएं
गुडिवाड़ा, विजयवाड़ा, तेनाली, बापटला, चिराला, ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, श्रीकालहस्ती, रेनीगुंटा, तिरुपति, पाकला, पीलर, मदनपल्ली, मुलकालाचेरुवु, कदिरी और मुदिगुब्बा में इस ट्रेन का ठहराव होगा। ट्रेन संख्या 07486 (विकाराबाद–एच.एस. नांदेड़) विकाराबाद से 20 जनवरी को सुबह 11.30 बजे रवाना होकर नांदेड़ उसी दिन रात 8.30 बजे पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव शंकरपल्ली, लिंगमपल्ली, बेगमपेट, सिकंदराबाद, बोलारम, मेडचल, अकनापेट, कामारेड्डी, निजामाबाद, बसर, धर्माबाद, उमरी और मुदखेड़ में होगा।
ट्रेन संख्या 07487 (विकाराबाद–तिरुपति) विकाराबाद से 20 जनवरी को शाम 4.15 बजे चलकर तिरुपति अगले दिन सुबह 8.30 बजे पहुंचेगी। इसका ठहराव शंकरपल्ली, लिंगमपल्ली, सिकंदराबाद, चारलपल्ली, नलगोंडा, मिर्यालगुडा, सत्तेनापल्ली, गुंटूर, तेनाली, चिराला, ओंगोल, नेल्लोर और रेनीगुंटा में होगा। एससीआर ने यात्रियों से अग्रिम आरक्षण कराने और इन विशेष सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की है, ताकि संक्रांति यात्रा सुगम और आरामदायक हो सके।
मकर संक्रांति उत्सव क्यों मनाया जाता है?
यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण यात्रा शुरू होती है, जिसे शुभ माना गया है। किसान वर्ग के लिए यह फसल कटाई का समय होता है, इसलिए आभार, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक बन गया है।
मकर संक्रांति के पीछे की कहानी क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं, जिससे संबंधों में मधुरता का संदेश मिलता है। साथ ही महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण में देह त्याग किया था, इसलिए इस काल को मोक्षदायक माना गया है।
मकर संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए?
परंपरा अनुसार तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है, साथ ही जरूरतमंदों को सहायता मिलती है।
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