जयंती पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की
करीमनगर। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार (Bandi Sanjay Kumar) ने रविवार को बाबू जगजीवन राम को भारतीय राजनीति का एक महान स्तंभ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक न्याय के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि बाबू जगजीवन राम दलित समाज के सच्चे रत्न थे और राष्ट्र सेवा को उन्होंने सर्वोच्च कर्तव्य माना। बाबू जगजीवन राम की जयंती के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने करीमनगर के मंचेरियल चौराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर चित्रा मिश्रा, चोप्पडांडी विधायक मेडीपल्ली सत्यम, मेयर कोलगानी श्रीनिवास (Mayor Kolgani Srinivas), डिप्टी मेयर सुनील राव सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बाबू जगजीवन राम ने बचपन से ही जातिगत भेदभाव के खिलाफ किया संघर्ष
इस मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए बंडी संजय कुमार ने कहा कि बाबू जगजीवन राम ने बचपन से ही जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया और जीवन के अंतिम क्षण तक ‘अछूतों’ के उत्थान के लिए कार्य करते रहे। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों का सामना कर ही व्यक्ति जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि बाबू जगजीवन राम 1952 में स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव से लेकर 1986 में अपने निधन तक लगातार सांसद रहे और करीब 29 वर्षों तक केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और राजनीतिक जीवन में एक ऐसे नेता के रूप में उभरे, जिनका कोई विरोधी नहीं था।
भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्रीय मंत्री का किया सम्मान
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे बाबू जगजीवन राम के आदर्शों और उनके द्वारा दिखाए गए सुधार के मार्ग से प्रेरणा लें। इस दौरान बंडी संजय कुमार ने करीमनगर के तीगलगुट्टापल्ली में मेयर कोलगानी श्रीनिवास द्वारा स्थापित मेयर कैंप कार्यालय का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्रीय मंत्री का सम्मान किया। उद्घाटन कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष गंगाड़ी कृष्णा रेड्डी, डिप्टी मेयर सुनील राव, भाजपा कॉर्पोरेटर एवं बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
हिंसा शब्द का अर्थ क्या है?
आमतौर पर इस शब्द का मतलब किसी को शारीरिक या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाना होता है। इसमें मारपीट, चोट पहुंचाना, डराना-धमकाना या किसी को कष्ट देना शामिल होता है। यह व्यवहार समाज में नकारात्मक माना जाता है और कानूनन भी दंडनीय हो सकता है। इसका विपरीत “अहिंसा” है, जिसका अर्थ होता है किसी को भी हानि न पहुंचाना।
हिंसा से आप क्या समझते हैं?
सरल भाषा में इसे ऐसे व्यवहार के रूप में समझा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति, समूह या जीव को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है। यह नुकसान शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक हो सकता है। गाली देना, धमकी देना, मारपीट करना या किसी को डराना—all इसमें शामिल होते हैं। यह समाज में अशांति और भय पैदा करता है, इसलिए इसे रोकना जरूरी माना जाता है।
हिंसा के 3 प्रकार कौन से हैं?
मुख्य रूप से इसे तीन प्रकारों में बांटा जाता है। पहला शारीरिक हिंसा, जिसमें मारपीट या चोट पहुंचाना शामिल है। दूसरा मानसिक (मनोवैज्ञानिक) हिंसा, जिसमें गाली, अपमान या डराना शामिल होता है। तीसरा सामाजिक या आर्थिक हिंसा, जिसमें किसी को अधिकारों से वंचित करना या आर्थिक रूप से दबाव डालना शामिल होता है। ये सभी रूप व्यक्ति और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
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