Peace : विभिन्न दलों ने युद्ध के खिलाफ शांति रैली निकाली

By Ajay Kumar Shukla | Updated: March 29, 2026 • 10:11 PM

हैदराबाद। अमेरिका- इजराइल- ईरान युद्ध (War) के खिलाफ समिति के बैनर तले आज चारमीनार से एग्ज़ीबिशन ग्राउंड तक एक शांति रैली आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियों, नागरिक समाज समूहों और समुदाय के नेताओं ने भाग लिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तेलंगाना जनता समिति, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), साथ ही शिया और सुन्नी समुदाय के धार्मिक प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठन रैली में सक्रिय रूप से शामिल हुए। वरिष्ठ नागरिक ने मार्च (March) में भाग लेकर वैश्विक संघर्षों के प्रति व्यापक चिंता व्यक्त की। रैली का नेतृत्व एम. कोदंडराम ने किया और इसका समन्वयन सैयद निज़ामुद्दीन ने किया।

युद्ध मानवता के लिए कोई लाभ नहीं लाता

प्रमुख नेताओं में के. नारायण, बी.वी. राघवुलु, मोता रोहित डीसीसी खैरताबाद, खालिद सैफुल्लाह डीसीसी हैदराबाद, मुश्ताक मलिक, और अमजदुल्लाह खान समेत अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। सभा में संबोधित करते हुए वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि युद्ध मानवता के लिए कोई लाभ नहीं लाता और यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर आर्थिक अस्थिरता को बढ़ाता है। प्रतिभागियों ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करें और संयुक्त राष्ट्र व अन्य वैश्विक नेताओं के साथ सक्रिय संवाद करके युद्ध को तुरंत समाप्त करने के लिए कदम उठाएँ। एग्ज़ीबिशन ग्राउंड में आयोजित जनता सभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री से राज्य विधानसभा में युद्ध समाप्ति के लिए एक प्रस्ताव पेश करने और शांति व कूटनीतिक प्रयासों का संदेश मजबूत करने का अनुरोध किया गया।
है।

ईरान भारत से कितना बड़ा है?

क्षेत्रफल के आधार पर ईरान लगभग 16.48 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जबकि भारत का क्षेत्रफल करीब 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर है। इस हिसाब से भारत, ईरान से लगभग दोगुना बड़ा है। इसलिए आकार के मामले में भारत का क्षेत्रफल काफी अधिक माना जाता है।

ईरान से भारत क्या-क्या लेता है?

मुख्य रूप से भारत, ईरान से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात करता रहा है, जो ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद भी लिए जाते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण हाल के वर्षों में आयात में कमी आई है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में ईरान एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।

इजरायल-ईरान युद्ध क्यों हो रहा है?

सीधा पूर्ण युद्ध नहीं, बल्कि तनाव और टकराव की स्थिति बनी रहती है। इजरायल और ईरान के बीच राजनीतिक, धार्मिक और रणनीतिक मतभेद हैं। ईरान, इजरायल का विरोध करता है और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाना चाहता है, जबकि इजरायल सुरक्षा कारणों से ईरान की नीतियों और परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता है। इसी वजह से दोनों के बीच तनाव बना रहता है।

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