हैदराबाद। राज्य सरकार ने सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के लिए 9 नई कोयला खनन परियोजनाओं के विकास की व्यापक योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, मौजूदा खदानों के बंद होने से होने वाली उत्पादन कमी की भरपाई करना और कर्मचारियों के रोजगार को बनाए रखना है। सरकार ने एससीसीएल को सभी प्रारंभिक कार्यों में तेजी लाने और आवश्यक वैधानिक मंजूरियां जल्द प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत एससीसीएल ने नौ परियोजनाओं के विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय (Central) कोयला, वन एवं पर्यावरण मंत्रालयों को स्वीकृति के लिए भेजे हैं।
रोजगार निरंतरता सुनिश्चित करने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री भट्टी विक्रमार्का मल्लू इन परियोजनाओं की प्रगति और मंजूरी प्रक्रिया की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। पमुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें कर राज्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए शीघ्र मंजूरी देने पर जोर दिया है। तीन परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। ओडिशा सरकार के समन्वय से ओडिशा स्थित नाइनी ब्लॉक में कोयला उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं कोठागुडेम स्थित वीके कोल माइंस में भी अधिकांश वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और उत्पादन शुरू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। एससीसीएल की चार खदानें वर्ष 2027-28 तक बंद होने की संभावना है, जिससे सालाना लगभग 12.51 मिलियन टन कोयला उत्पादन में कमी आने का अनुमान है।
इस कमी को पूरा करेंगी नौ परियोजनाएं
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित नौ परियोजनाएं इस कमी को पूरा करेंगी और अगले दो दशकों तक निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। इन परियोजनाओं में नई ओपन-कास्ट खदानों का विकास, मौजूदा खदानों का विस्तार और पहले बंद की जा चुकी भूमिगत खदानों से शेष कोयला भंडार का दोहन शामिल है। राज्य सरकार के निर्देशों के तहत एससीसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. बुद्धप्रकाश ज्योति ने शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को लंबित वैधानिक मंजूरियों में तेजी लाने और सरकार द्वारा तय लक्ष्य के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में कम से कम तीन परियोजनाओं से उत्पादन शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
1 किलो कोयले की कीमत क्या है?
बाजार में कोयले की कीमत उसके प्रकार और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर घरेलू उपयोग वाला कोयला लगभग 10 रुपये से 40 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है। औद्योगिक और उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की कीमत इससे अधिक हो सकती है। अलग-अलग राज्यों और बाजारों में दरें बदलती रहती हैं।
भारत में प्रथम कोयला खदान कौन सी थी?
देश की पहली कोयला खदान Raniganj Coalfield मानी जाती है। यहां 1774 में ब्रिटिश काल के दौरान कोयले का खनन शुरू हुआ था। यह क्षेत्र भारतीय कोयला उद्योग की शुरुआत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
भारत में सबसे ज्यादा कोयला कौन से राज्य में पाया जाता है?
कोयले का सबसे बड़ा भंडार Jharkhand में पाया जाता है। इसके अलावा Odisha, Chhattisgarh और West Bengal भी प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य हैं।
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