हैदराबाद। राज्य के कृषि मंत्री (Minister) तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराने में कृषि विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने किसानों से बाजार में मांग वाली फसलों की ही खेती करने तथा फसल चक्र पद्धति अपनाने की अपील की। मंत्री ने शनिवार को राजेंद्रनगर स्थित प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय का दौरा किया और “बीजोत्सव-2026” कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने दस किसानों को विभिन्न फसलों के गुणवत्तापूर्ण मूल बीज वितरित किए। दौरे के दौरान मंत्री ने पिछले वर्ष स्थापित “सेंटर फॉर डिजिटल एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी” का निरीक्षण किया और ड्रोन (Drone) तकनीक पर चल रहे अनुसंधानों की जानकारी ली।
बाजार में मांग वाली फसलों की ही खेती करें किसान
उन्होंने कहा कि भविष्य में कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी बढ़ सकती है, ऐसे में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता और अधिक बढ़ेगी। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ड्रोन आधारित कृषि प्रणालियों की उन्होंने सराहना की। इसके अलावा एसबीआई-सीएसआर फंड से विकसित रोबोटिक्स एवं सेंसर आधारित प्रयोगशाला का भी मंत्री ने अवलोकन किया। कृषि कार्यों में उपयोगी रोबोट विकसित करने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को बधाई दी। सी- डीएटी के अंतर्गत आने वाली आरएस और जीआईएस लैब में अधिकारियों ने मंत्री को उपग्रह आधारित आंकड़ों की जानकारी दी। इस दौरान बताया गया कि राज्य में किसानों के स्वामित्व वाली लगभग 9.3 प्रतिशत भूमि वर्तमान में खेती के उपयोग में नहीं है।
कृषि विश्वविद्यालय में ‘बीजोत्सव-2026’ का शुभारंभ
“99 दिन जन-शासन–प्रगति योजना” के तहत आयोजित बीजोत्सव कार्यक्रम की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना सराहनीय पहल है। उन्होंने किसानों को निजी बीज कंपनियों के झूठे दावों से सावधान रहने और प्रमाणित बीजों का उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने की सलाह दी। मंत्री ने कहा कि लगभग 60 वर्ष पुराने इस कृषि विश्वविद्यालय ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कई महान हस्तियों के सहयोग से देश में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सहयोग से विश्वविद्यालय और अधिक प्रगति करेगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के साथ निरंतर संपर्क में रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करने तथा विश्वभर में विकसित हो रही आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के उपकुलपति अल्दास जनैया ने बताया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पिछले वर्ष से यह बीज वितरण कार्यक्रम शुरू किया गया है। कार्यक्रम में अनुसंधान निदेशक डॉ. मराठी बलराम, डॉ. बालाजी नायक, डॉ. नीलिमा, डॉ. वेंकटेश्वरलु, डॉ. जेल्ला सत्यनारायण, डॉ. वाई. चंद्रमोहन सहित कई वैज्ञानिक और किसान उपस्थित रहे।
12वीं के बाद एग्रीकल्चर में कौन सा कोर्स बेस्ट है?
कृषि क्षेत्र में करियर बनाने के लिए B.Sc Agriculture सबसे लोकप्रिय और बेहतर कोर्स माना जाता है। इसके अलावा कृषि इंजीनियरिंग, हॉर्टिकल्चर, डेयरी टेक्नोलॉजी और फूड टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स भी अच्छे विकल्प हैं। इन पाठ्यक्रमों में खेती, मिट्टी, फसल उत्पादन और कृषि तकनीक से जुड़ी पढ़ाई कराई जाती है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार कोर्स चुनना बेहतर माना जाता है।
कृषि अधिकारी की 1 महीने की सैलरी कितनी होती है?
सरकारी कृषि अधिकारी का वेतन राज्य, पद और अनुभव के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर शुरुआती मासिक सैलरी लगभग 40 हजार रुपये से 70 हजार रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है। इसमें महंगाई भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं। पदोन्नति और अनुभव बढ़ने के साथ वेतन में वृद्धि होती है। केंद्र और राज्य सरकारों में वेतनमान अलग हो सकते हैं।
भारत में कौन-कौन से कृषि विश्वविद्यालय हैं?
देश में कई प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय हैं, जिनमें गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, आचार्य एन. जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय और राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। ये संस्थान कृषि शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक खेती तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत के लगभग हर राज्य में कृषि विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं।
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