करीमनगर । राज्य के किसानों को नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सरकार ने हरी खाद के बीजों पर सब्सिडी में कटौती कर दी है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ गई हैं। किसानों को जो बीज पहले 60 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जाता था, अब उसे 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसके कारण किसानों को हरी खाद के प्रत्येक बैग पर 1000 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
तीन प्रकार की होती है हरी खाद
भूमि की उर्वरता बढ़ाने और उर्वरक के उपयोग को कम करने के लिए Green Manure के बीज सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाते हैं। Green Manure तीन प्रकार की होती है – जीलुगा, पिल्लिपेसरा और जानुमु। सब्सिडी में कटौती के बाद 30 किलो के जीलुगा बैग की कीमत 1,116 रुपये से बढ़कर 2,137 रुपये हो गई है। 20 किलो के पिल्लिपेसरा बैग की कीमत 1,084 रुपये से बढ़कर 2,055 रुपये हो गई है, जबकि 40 किलो के जनुमु बैग की कीमत 1,448 रुपये से बढ़कर 2,510 रुपये हो गई है।
मध्य मई के आसपास बोई जाती है हरी खाद
इस बढ़ती कीमतों से उनके बजट पर असर पड़ने की चिंता में किसान राज्य सरकार से सब्सिडी बढ़ाने और पुराने दामों पर बीज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। किसान, जो आमतौर पर वनकालम सीजन के लिए मध्य मई के आसपास हरी खाद बोते हैं, वे भी बीज का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि कई केंद्रों में अभी भी पर्याप्त बीज स्टॉक उपलब्ध नहीं है।
Green Manure की ये फसलें दलहनी व अदलहनी दोनों तरह की होती हैं पर ज्यादातर दलहनी फसलों को शामिल करते हैं क्योंकि इन फसलों में नाइट्रोजन बनाए रखने की कूवत होती है। खेती में हरी खाद उस सहायक फसल को कहते हैं जिस की खेती मुख्यत: जमीन में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने और जैविक पदार्थों की भरपाई करने के मकसद से की जाती है।
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