हैदराबाद। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) द्वारा शुक्रवार को “राष्ट्रीय डेंगू दिवस” मनाया गया। इस वर्ष का विषय “यूनिट, एक्ट एंड इलिमिनेट” रखा गया, जिसका उद्देश्य डेंगू की रोकथाम के लिए सामूहिक भागीदारी और समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर मसाब टैंक स्थित यूपीएचसी (UPHC) अफजल सागर की एंटोमोलॉजी टीम, वरिष्ठ एंटोमोलॉजिस्ट, चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी तथा जीएचएमसी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने जागरूकता रैली निकाली। साथ ही पंपलेट वितरण और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मानसून के बाद के मौसम में तेजी से फैलने वाली बीमारी है डेंगू
अधिकारियों ने बताया कि डेंगू विशेष रूप से मानसून और मानसून के बाद के मौसम में तेजी से फैलने वाली बीमारी है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलभराव, खराब कचरा प्रबंधन, जनसंख्या की आवाजाही और जलवायु परिवर्तन के कारण एडीज मच्छरों का प्रजनन बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। भारत सरकार वर्ष 2016 से हर साल 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मना रही है, ताकि मानसून से पहले लोगों को जागरूक किया जा सके और रोकथाम के उपायों को मजबूत बनाया जा सके।
अभियान के तहत लोगों को पानी के बर्तनों को ढककर रखने, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और मच्छरों के काटने से बचाव के उपाय अपनाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा बैनर, पोस्टर और पंपलेट के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई गई। यह कार्यक्रम गोलकोंडा जोन के गोशामहल सर्किल-30 और मसाब टैंक सर्किल-34 के स्वास्थ्य अधिकारियों की देखरेख में आयोजित किया गया।
डेंगू का रोग जनक कौन था?
यह बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। वैज्ञानिकों ने 20वीं शताब्दी में इस वायरस की पहचान की थी। Dengue fever उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है। संक्रमित मच्छर साफ पानी में पनपते हैं और दिन के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। समय पर इलाज और बचाव को इस बीमारी से सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस कब मनाया जाता है?
भारत में हर वर्ष 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को डेंगू से बचाव, स्वच्छता और मच्छरों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना होता है। स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न संस्थाएं इस दिन जागरूकता अभियान चलाती हैं। साफ-सफाई और पानी जमा न होने देने पर विशेष जोर दिया जाता है। बीमारी के लक्षणों की जानकारी और समय पर उपचार को भी महत्वपूर्ण बताया जाता है।
डेंगू में किसका दूध पीना चाहिए?
बीमारी के दौरान हल्का और पौष्टिक आहार लेना उपयोगी माना जाता है। सामान्य रूप से गाय का दूध या अन्य हल्का दूध डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिया जा सकता है, यदि मरीज को पचाने में समस्या न हो। शरीर में पानी की कमी न होने देना बहुत जरूरी माना जाता है, इसलिए नारियल पानी, फल का रस और तरल पदार्थ अधिक दिए जाते हैं। किसी भी विशेष आहार या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना सुरक्षित माना जाता है।
डेंगू के बचाव के उपाय?
मच्छरों से बचाव करना इस बीमारी को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है। घर और आसपास पानी जमा न होने देना चाहिए क्योंकि एडीज मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करना उपयोगी माना जाता है। बुखार, कमजोरी या शरीर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्वच्छता और जागरूकता से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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