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Politics : विपक्ष ने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया – किशन रेड्डी

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: April 18, 2026 • 9:13 PM
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हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी (Union Minister G. Kishan Reddy) ने विपक्षी दलों पर संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे ‘ऐतिहासिक भूल’ बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक सुधारों में बाधा आई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य विधायी प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है और दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव के आरोप बेबुनियाद हैं। रेड्डी (Reddy) ने आरोप लगाया कि विपक्ष इन विधेयकों का विरोध करने के लिए ठोस कारण नहीं दे पाया और जनता को गुमराह कर रहा है।

महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को हुआ नुकसान

उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस रवैये से महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को नुकसान हुआ है और उनके अधिकारों के साथ विश्वासघात हुआ है। रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से इन विधेयकों में बाधा डाली गई, जिससे महिलाओं और वंचित वर्गों को राजनीति में अधिक अवसर मिलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि इस कदम से उन महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है जो राजनीति में आकर समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं।

महिला आरक्षण का 33% आरक्षण क्या है?

इस प्रावधान के तहत महिलाओं के लिए कुल सीटों में से 33% सीटें आरक्षित की जाती हैं, ताकि उनकी भागीदारी बढ़ सके। यह व्यवस्था पहले से पंचायत और नगर निकायों में लागू है। अब संसद और विधानसभाओं में भी इसे लागू करने का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है।

भारत में महिलाओं को कितना आरक्षण है?

देश में महिलाओं के लिए आरक्षण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग है। पंचायत और नगर निकायों में कम से कम 33% आरक्षण दिया गया है, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50% तक किया गया है। संसद और विधानसभाओं में भी 33% आरक्षण का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है, जो अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।

महिला आरक्षण कब लागू होगा?

संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लागू होगा, लेकिन इसके लिए पहले जनगणना और परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। इसके बाद ही यह प्रावधान प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, इसलिए इसकी सटीक तारीख अभी तय नहीं है।

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