हैदराबाद । तेलंगाना के श्रम मंत्री विवेक वेंकटस्वामी (Vivek Venkatswamy) ने कहा कि बंधुआ मजदूरी एक गंभीर समस्या है, जो मानव गरिमा को गहराई से प्रभावित करती है। इसके उन्मूलन के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों और आम जनता के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार (Government) बचाव अभियान, पुनर्वास कार्यक्रम, आवास सहायता और सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूत कर रही है तथा सभी विभागों से समन्वय के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है ताकि लोग अपने अधिकारों को समझें और शोषणकारी व्यवस्था का शिकार न बनें। साथ ही पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
बंधुआ मजदूरी के खिलाफ आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय कार्यशाला
विवेक वेंकटस्वामी यह बातें मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय कार्यशाला में बोल रहे थे, जिसका आयोजन तेलंगाना पुलिस के महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ ने अंतरराष्ट्रीय न्याय मिशन के सहयोग से किया। इस कार्यशाला में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, पुलिस अधिकारी, न्यायपालिका के प्रतिनिधि, विधि विशेषज्ञ, मीडिया कर्मी और सामाजिक संगठन शामिल थे। कार्यक्रम में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए समन्वित कार्रवाई को मजबूत करने पर बल दिया गया।
उद्घाटन सत्र में तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी, महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चारु सिन्हा तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डी. अनसूया सीतक्का उपस्थित रहीं। कार्यशाला में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और देह व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें बंधुआ मजदूरी को एक छिपे हुए और कम रिपोर्ट होने वाले संगठित अपराध के रूप में चिन्हित किया गया। सत्रों में कानूनों के सख्त क्रियान्वयन, प्रभावी जांच, अभियोजन प्रणाली को मजबूत करने और विशेष इकाइयों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बंधुआ मजदूरी एक जबरन संगठित अपराध
पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि बंधुआ मजदूरी केवल श्रम से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि एक जबरन संगठित अपराध है, जिसमें लोगों को झूठे वादों के जरिए फंसाकर शोषण की स्थिति में रखा जाता है और वे बिना बाहरी मदद के निकल नहीं पाते। उन्होंने पीड़ितों की पहचान, मजबूत जांच और आधुनिक तकनीक के उपयोग से दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चारु सिन्हा ने कहा कि बंधुआ मजदूरी को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और इसे अपराध के रूप में पहचानना आवश्यक है।
उन्होंने जांच को पूरी शोषण श्रृंखला तक विस्तारित करने और पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव अनीता रामचंद्रन ने कहा कि केवल बचाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थायी पुनर्वास जरूरी है, अन्यथा पीड़ित फिर से शोषण की स्थिति में लौट सकते हैं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि ने न्यूनतम वेतन का भुगतान न करना भी जबरन श्रम का एक रूप बताया।
जीवित बची पीड़िता शिवम्मा ने अपना अनुभव साझा किया
मुख्य वक्ता के रूप में सीतक्का ने कहा कि कानून होना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उसका प्रभावी क्रियान्वयन है। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने, अन्य राज्यों के पीड़ितों के साथ समान संवेदनशीलता रखने और स्थानीय रोजगार, स्वयं सहायता समूहों तथा सामुदायिक तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यशाला में सामुदायिक स्तर पर समन्वय, मीडिया की भूमिका, आंकड़ों आधारित नीतियों और बचाव तथा पुनर्वास प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब जीवित बची पीड़िता शिवम्मा ने अपना अनुभव साझा किया और पीड़ितों की भागीदारी पर आधारित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :