हैदराबाद। ईसाई नेता यरुशलम मत्तैया ने कांग्रेस सरकार (Congress government) द्वारा लगातार उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए 20 दिसंबर को एलबी स्टेडियम (LB Stadium) में आयोजित मुख्यमंत्री के क्रिसमस डिनर के बहिष्कार का आह्वान किया है। मीडिया से बात करते हुए मत्तैया ने कहा कि सरकार चुनावी घोषणापत्र, अल्पसंख्यक घोषणा और ईसाई घोषणा में किए गए वादों को लागू करने में विफल रही है। इनमें कल्याणकारी योजनाएं, तीर्थयात्राएं और पादरियों को वित्तीय सहायता शामिल हैं।
संवैधानिक पदों पर ईसाइयों की नियुक्ति न होने जैसी कई शिकायतें
उन्होंने यरुशलम तीर्थयात्रा के क्रियान्वयन न होने, पादरियों को मानदेय न दिए जाने, ईसाई कब्रिस्तानों के लिए भूमि की कमी, चर्चों को अनुमति देने में देरी, संवैधानिक पदों पर ईसाइयों की नियुक्ति न होने जैसी कई शिकायतें गिनाईं। उन्होंने क्रिसमस उपहार वितरण में भेदभाव और क्रिश्चियन भवन के अधूरे निर्माण की भी आलोचना की। विरोध के तौर पर उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने वाले ईसाई नेताओं से काले झंडे और बैज पहनने का आग्रह किया तथा मुख्यमंत्री को मांगों पर प्रतिक्रिया देने के लिए 48 घंटे का समय दिया।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन कब किया गया था?
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन 17 मई 1993 को किया गया था। यह आयोग राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत बनाया गया, जिसका उद्देश्य देश में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके कल्याण से जुड़े मामलों पर सरकार को सलाह देना है।
अल्पसंख्यकों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा 1992 क्या है?
अल्पसंख्यकों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा 1992 एक अंतरराष्ट्रीय घोषणा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर 1992 को अपनाया था। इसका उद्देश्य धार्मिक, भाषाई, राष्ट्रीय और जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा, उनकी पहचान बनाए रखना और भेदभाव को रोकना है।
प्रधानमंत्री अल्पसंख्यक योजना क्या है?
प्रधानमंत्री अल्पसंख्यक योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं का समूह है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इसमें छात्रवृत्ति, कौशल प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रम शामिल हैं।
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